Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी को लेकर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद देशभर में लोग मतदाता सूची में हो रही गड़बड़ियों को समझने लगे हैं और अब खुलकर विसंगतियों की बात कर रहे हैं। वेणुगोपाल ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि लोगों को यह एहसास हो रहा है कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। यह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह इन चिंताओं का समाधान करे, लेकिन आयोग जवाब देने के बजाय केवल राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर निशाना साध रहा है।कांग्रेस महासचिव ने कहा कि देश को एक निष्पक्ष, स्वतंत्र और भरोसेमंद चुनाव आयोग की आवश्यकता है, लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा आयोग अब अस्तित्वहीन नजर आ रहा है। आयोग का रवैया सरकार के पक्ष में झुका हुआ है, जिससे उसकी साख पर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि बिहार में एसआईआर के तहत करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। कांग्रेस इसे एक सोची-समझी साजिश बता रही है और लगातार सड़कों से लेकर कोर्ट तक इस मुद्दे को ले जा रही है।
मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र रूप से जांच कराए चुनाव आयोग : राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और हालिया चुनावों में कथित वोट चोरी को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर हमला बोला है। उन्होंने चुनाव आयोग से निष्पक्षता बरतने और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। प्रमोद तिवारी ने यहां पत्रकारों से कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत के हर नागरिक को संविधान द्वारा प्रदत्त सबसे बड़े अधिकार यानी मतदान के अधिकार की रक्षा का मामला है। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार 300 से अधिक सांसद सड़कों पर उतरे ताकि वे चुनाव आयोग से यह अपील कर सकें कि जनता का वोट देने का अधिकार न छीना जाए। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसद शांतिपूर्वक प्रदर्शन करना चाहते थे, लेकिन सरकार ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए और उन्हें हिरासत में ले लिया। कई सांसदों को पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि लोकतांत्रिक मूल्यों को दबाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस सांसद तिवारी ने कहा कि क्या यह तानाशाही नहीं है? उन्होंने कहा कि अगर सरकार जनप्रतिनिधियों को भी अपनी बात कहने और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाने से रोकेगी, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। तिवारी ने चुनाव आयोग से निष्पक्षता बरतने और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच की मांग की।
