तेलंगाना सरकार को कोर्ट से झटका, निकाय चुनाव में पिछड़ी जातियों को 42 प्रतिशत आरक्षण पर राेक, चुनाव टले

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Eksandeshlive Desk

हैदराबाद : तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के स्थानीय निकाय चुनाव कराने और चुनाव में पिछड़ी जातियों को 42 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी आदेश पर राेक लगा दी है। उच्च न्यायालय के इस आदेश से कांग्रेस शासित राज्य सरकार को तगड़ा झटका लगा है। काेर्ट ने याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही उच्च न्यायालय ने सरकार को भी चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। इसी के तहत सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई है। न्यायालय के आदेश के बाद राज्य में स्थानीय निकायटल गए हैं। राज्य चुनाव आयोग उच्च न्यायालय के आदेश का निरीक्षण करने के बाद ही कोई निर्णय लेगा। इससे पहले स्थानीय निकाय चुनाव में पिछड़े वर्गों (बीसी) के आरक्षण के मुद्दे पर तेलंगाना उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल सुदर्शन रेड्डी ने अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा कि सर्वेक्षण से पता चला है कि 57.6 प्रतिशत पिछड़े वर्ग की आबादी है। जब पिछड़े वर्गों की संख्या पर कोई आपत्ति नहीं है, तो याचिकाकर्ताओं को रिपोर्ट क्यों दी जाए? किसी भी पक्ष ने विधेयक पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।

अधिसूचना जारी होने के बाद अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं : सरकारी वकील का कहना था कि अगर राज्यपाल समय सीमा के भीतर इसे मंज़ूरी नहीं देते हैं, तो इसे क़ानून के रूप में मानना ​​होगा। तमिलनाडु मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के अनुसार, इसे अलग से अधिसूचित करने की कोई ज़रूरत नहीं है। अटॉर्नी जनरल सुदर्शन रेड्डी ने उच्च न्यायालय का ध्यान इस ओर दिलाया कि स्थानीय निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है। अधिसूचना जारी होने के बाद अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। केंद्र सरकार भी तेलंगाना का अनुसरण करेगी और जनगणना में जातिगत विवरण शामिल करेगी। शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण अलग-अलग हैं। स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण अलग है। इंदिरा साहनी का मामला शिक्षा और नौकरियों से जुड़ा है। उन्होंने बताया, ‘हम सिर्फ़ राजनीतिक आरक्षण के लिए जीवो लाए थे।’ सरकार की ओर से एक अन्य वकील रवि वर्मा ने कहा कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि 50 प्रतिशत आरक्षण से ज़्यादा न हो। उन्होंने कोर्ट को बताया, ‘तेलंगाना में सिर्फ़ 15 प्रतिशत आबादी को आरक्षण नहीं है। हम उन 15 प्रतिशत लोगों को 33 प्रतिशत सीटें दे रहे हैं।’ हालांकि, सरकार की ओर से बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनाव की अधिसूचना पर रोक लगा दी।

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