रांची : नेशनल यूनिवर्सिटी आॅफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ रांची में अंडरट्रायल कैदियों तक प्रभावी कानूनी सहायता पहुँचाने और कानूनी शिक्षा को सुदृढ़ करने को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस पहल की अगुवाई विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक आर. पाटिल कर रहे हैं, जिनके मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय एक नई परियोजना की शुरूआत करने जा रहा है। बैठक में परियोजना की रूपरेखा, कार्यनीति तथा इसकी पहुँच अधिक से अधिक लोगों तक सुनिश्चित करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव कुमारी रंजना अस्थाना, कारा विभाग के एआईजी श्री तुषार कुमार गुप्ता, विश्वविद्यालय के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. जिसू केतन पटनायक, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कौशिक बागची, डॉ. श्रीमांशु दास, विजिÞटिंग फैकल्टी डॉ. अमनदीप कौर, सेक्शन आॅफिसर मिनाक्षी साहू सहित परियोजना से जुड़े सभी सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में ठवरफछ द्वारा प्रस्तावित कॉन्टिन्यूअस लीगल एजुकेशन कार्यक्रम एवं अंडरट्रायल प्रिजनर्स परियोजना के शुभारंभ को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। चर्चा के दौरान राज्य के ऐसे अधिवक्ताओं, जिनका अनुभव पाँच वर्ष से कम है, उन्हें बेहतर प्रशिक्षण प्रदान करने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि उनकी विधिक दक्षता और वकालत कौशल को और मजबूत किया जा सके। इसके साथ ही, वळढ परियोजना के अंतर्गत खूंटी एवं रांची जेल में विचाराधीन बंदियों को प्रभावी कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की योजना पर सहमति बनी। यह परियोजना न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करने और बंदियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
