कला के फूल, परंपरा की अमर खुशबू- भारतीय दृश्य कला की अग्रणी विदुषी प्रो. उत्तमा

CULTURE

Eksandeshlive Desk

जमशेदपुर : ओडिशा की पूर्वोदय आर्ट फाउंडेशन और तुलिका के संयुक्त तत्वावधान में छठा अंतरराष्ट्रीय कला कार्यशाला का आयोजन 29–30 दिसम्बर को सोनारी, जमशेदपुर स्थित जनजातीय संस्कृति केंद्र में हुआ। इस अवसर पर देश के 18 राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता और सांस्कृतिक विविधता की अनूठी छटा बिखेरी। कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने हेतु बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय की अधिष्ठाता एवं भारतीय दृश्य कला की अग्रणी विदुषी प्रो. उत्तमा दीक्षित मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने कलाकारों को “प्रकृति और सौंदर्य के सिपाही, परंपरा के संरक्षक” बताते हुए कहा कि भारतीय कला केवल कैनवास पर रंग भरना नहीं है, बल्कि यह देश की स्मृतियों और इतिहास को जीवित रखने का माध्यम है।

इस आयोजन में लगभग 90 कलाकारों ने भाग लिया और अपनी रचनाओं के माध्यम से लोककला, परंपरागत शैलियों और आधुनिक दृष्टि का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। एक कलाकार ने काशी और भगवान शिव की नगरी को नमन करते हुए अपनी कला को प्रार्थना का रूप दिया। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. अशुतोष मिश्रा, श्री समरेन्द्र मिश्रा, जनजातीय कलाकार श्रीमती सुनीता देवी और विजय चित्रकार शामिल रहे। सत्र में डॉ. मीनकेतन पटनायक ने वक्ता के रूप में विचार रखे। कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय नर्तकों और संगीतकारों के लोक प्रदर्शन से हुई। इसके बाद अतिथियों और कलाकारों का स्वागत पारंपरिक आरती, तिलक और जनजातीय गमछा से किया गया। पहले दिन की कार्यशाला में रचनात्मकता, सहयोग और कलात्मक उत्साह की भरपूर झलक देखने को मिली। प्रतिभागियों ने अपनी कला के माध्यम से प्रकृति, इतिहास और आध्यात्मिकता को जीवंत किया। आयोजकों ने सभी कलाकारों, कला प्रेमियों, सांस्कृतिक उत्साहियों और विद्यार्थियों का उद्घाटन समारोह और कला कार्यशाला में उपस्थित होकर इसे सफल बनाने के लिए हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। यह आयोजन भारतीय कला की विविधता और परंपरा के संरक्षण का सशक्त संदेश देता है। दो दिवसीय कार्यशाला ने यह स्पष्ट किया कि कलाकार फूलों की तरह हैं, जिनकी खुशबू युगों तक बनी रहती है और जो देश की परंपरा को महकाते रहते हैं।

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