Eksandeshlive Desk
दुमका : भारत की तीसरी सबसे बड़ी आदिवासी जनजाति संताल समुदाय के पारंपरिक व मूल संताली भाषा-साहित्य का संरक्षण, संवर्द्धन और विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य को लेकर प्रबुद्ध संताली भाषा प्रेमी व ज्ञाता सह संताली लैंग्वेज एंड कल्चरल एसोसिएशन की केन्द्रीय कमिटी की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को कड़हरबील में एसोसिएशन के अध्यक्ष बर्नाबास भूषण किस्कू के अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
बैठक पर उपस्थित प्रबुद्ध संताली ज्ञाताओं ने बदलते परिवेश में पारंपरिक व मूल संताली भाषा पर बाहरी मिश्रण व प्रदूषण से हो रहे विलोपन के प्रति अत्यधिक चिंता जाहिर करते हुए संताली भाषाई उच्चारण, भावार्थ जैसे अन्य आवश्यक पहलुओं को प्रदूषणमुक्त रखने के लिए लगातार संताली भाषा-साहित्य का विकास और पठन-पाठन को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। इस संदर्भ में उन्होंने यह भी निर्णय लिया कि संताली भाषा-साहित्य व कल्चरल से संबंधित कार्याक्लाप करने वाले स्थानीय सामाजिक जनसंगठन, संस्था, संघ, ट्रस्ट के साथ निरंतर नेटवर्किंग और आपसी समन्वय स्थापित कर संताली भाषा का पठन-पाठन जैसी सेवाऍं और सुविधाऍं आमजनों व छात्र-छात्राओं के लिए उपलब्ध कराने का पहल करेंगे। इस मौके पर प्रबुद्ध संताली ज्ञाता के रुप में एन्नौसेंट सोरेन, शिवलाल बी. मरांडी, इग्नाशियुस मरांडी, माईकेल हांसदा, हाबिल मुर्मू व दानिएल हांसदा विशेष रुप से उपस्थित थे।
