Reporting by Mustaffa
रांची :साहिबगंज,राष्ट्रीय साहित्यिक मंच के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय भव्य साहित्यिक समागम में देश भर के साहित्यकारों का जमावड़ा लगा। इस अवसर पर अपनी लेखनी से हिंदी और अंग्रेजी साहित्य को समृद्ध करने वाले प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. अनंग मोहन मुखर्जी को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए ‘साहित्य श्री सम्मान’ से विभूषित किया गया।
“सम्मान और स्मृतियों का संगम”
10 और 11 जनवरी को आयोजित इस गरिमामय समारोह में डॉ. मुखर्जी को मुख्य अतिथि एवं गणमान्य अतिथियों द्वारा अंगवस्त्र,प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान ग्रहण करने के उपरांत डॉ. मुखर्जी ने अपनी साहित्यिक यात्रा के संघर्षों और उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने अपनी कविताओं का पाठ भी किया, जिसकी मर्मस्पर्शी पंक्तियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
“वैश्विक पटल पर पहचान”
उल्लेखनीय है कि डॉ. अनंग मोहन मुखर्जी केवल राष्ट्रीय ही नहीं,बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुके हैं। उन्हें पूर्व में:
- ब्रुकलिन अंतरराष्ट्रीय अवार्ड
- इंडो-स्पेनिश अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार
- रवीन्द्र रत्न पुरस्कार और
- प्रेमचंद पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर उनकी समान पकड़ उन्हें एक बहुआयामी साहित्यकार बनाती है।
“नई प्रतिभाओं को मिला उड़ान का अवसर”
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मंच ने केवल स्थापित दिग्गजों को ही नहीं सराहा, बल्कि क्षेत्रीय छात्र-छात्राओं को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया। स्थानीय कलाकारों और युवा साहित्यकारों को गढ़ने का यह प्रयास क्षेत्र में नई सांस्कृतिक चेतना जागृत करने वाला सिद्ध हुआ।
“सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बना साहिबगंज”
विभिन्न राज्यों से आए कवियों और विचारकों के रचनात्मक संवादों से पूरा वातावरण साहित्यिक ऊर्जा से सराबोर रहा। उपस्थित श्रोताओं और प्रबुद्ध वर्ग ने राष्ट्रीय साहित्यिक मंच के इस सफल आयोजन और डॉ. मुखर्जी के सम्मान की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
