Eksandeshlive Desk
धनबाद : 19 जनवरी को 71वें जीवन बीमा व्यवसाय राष्ट्रीयकरण दिवस पूरे धूम धाम से मनाया गया। इस अवसर पर बीमा कर्मचारी संघ हजारीबाग मंडल के धनबाद इकाई द्वारा शहर में कई सारे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य रूप से धनबाद शाखा दो में निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं रक्त दान शिविर का आयोजन किया गया था, जो कि एशियन जालान हस्पताल के सहयोग से संपूर्ण हुआ। इसमें सैंकड़ों कर्मचारी एवं अधिकारियों ने अपना अपना हेल्थ चेकअप कराया। इसके अलावा रणधीर वर्मा मोड़ में संघ के द्वारा एक मानव श्रृंखला का भी आयोजन किया गया था, जिसमें सैंकड़ों सदस्यों एवं नेतागण उपस्थित थे।
इस अवसर पर बीमा कर्मचारी संघ के महामंत्री जगदीश चंद्र मित्तल ने कहा कि 19 जनवरी 2026 को जीवन बीमा व्यवसाय राष्ट्रीयकरण के 70 वर्ष पूर्ण करने पर एलआईसी के बीमा धारकों, कर्मचारियों, अधिकारियों, विक्रय वाहिनी के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा के प्रति समर्पित देश के प्रत्येक नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि 245 से अधिक निजी बीमा कंपनियों को समाहित कर 1 सितंबर 1956 को संसद के कानून के जरिए जीवन बीमा के राष्ट्रीयकरण के निर्णय के तहत भारतीय जीवन बीमा निगम की गई थी। संघ के अध्यक्ष हेमंत मिश्रा ने कहा कि स्थापना के बाद से, LIC ने सभी मूलभूत उद्देश्यों को पूरा करते हुए शानदार प्रदर्शन किया है। यह घर-घर में जाना-पहचाना नाम बन गया है, पॉलिसीधारकों का पूरा विश्वास और समर्थन जीता है। संघ के संगठन सचिव अमित कुमार ने कहा कि एलआईसी ने 31 मार्च 2025 तक बड़े पैमाने पर समुदाय के लाभ के लिए 54,52,296 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इसने अब तक केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिभूतियों और आवास, बिजली, सिंचाई, सड़क और पुल, रेलवे आदि के लिए निवेश के रूप में 37,19,932 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं। संघ के सहायक सचिव सुबीर राम ने कहा कि एलआईसी के पास देश में 56,22,929 करोड़ रुपये का मजबूत वित्तीय परिसंपत्ति आधार है। अपने 100 करोड़ के पूंजी आधार पर, एलआईसी ने अब तक भारत सरकार को लाभांश के रूप में 38,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संघ के अमित कुमार, हेमंत मिश्रा, सुबीर राम, शुभम राज, जागेश्वर राम, मनीषा कुमारी, शर्मिला सरकार, राकेश कुमार, बासु बहादुर, संजय पाठक, स्वपन दास , मुकेश कुमार, देवाशीष चौधरी, मनोज कुमार, भोला रजवार, अलगू प्रसाद, सिद्धेश्वर मोदी एवं अन्य का योगदान रहा।
