Eksandeshlive Desk
पलामू : झारखंड सहित देश के अन्य राज्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीवों की तस्करी में संलिप्त अपराधियों को पकड़ने के लिए वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, पलामू टाइगर रिजर्व और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई 61 आराेपित गिरफ्तार किए गए हैं। यह जानकारी पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेश कांत जेना ने गुरुवार काे दी। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई झारखंड के साथ बिहार और छतीसगढ में कार्रवाई की गई। इन तस्करों में से झारखंड से सबसे अधिक 47, छतीसगढ से 10 और बिहार से 4 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। जेना ने कहा कि इन तस्कारों के पास से बिहार और छत्तीसगढ़ से 60 किलो पैंगोलिन का छाल, रांची और बिहार के बक्सर से दो रेड सैंड बोआ स्नेक, जमशेदपुर से 2 किलो कोराल, बिहार के दरभंगा से हिरण की दो और लेपर्ड की एक स्कीन, पलामू के हरिहरगंज से दो बोतल सांप का जहर, पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र से तीन भरठूआ बंदूक, एक मोर का पैर, बाघ की हड्डी का पाउडर, एक स्कॉर्पियो और एक बाइक बरामद की गई।
उपनिदेशक प्रजेश कांत जेना ने कहा कि इस अभियान को डीएफओ मेदिनीनगर, लातेहार, गढवा, जमशेदपुर, रांची, गुमला पालकोट के अलावा छत्तीसगढ़, बिहार के दरभंगा, बांका ने मिलकर चलाया और वन्यजीवों की तस्करी में संलिप्तत राज्य और अंतरराष्ट्रीय गिरोह को पकड़ने में सफलता हाथ लगी। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार तस्कर प्रभाव वाले पाए गए हैं। कोई मंत्री का रिश्तेदार है तो कोई मेयर का पति है। ऐसे लोग अपने प्रभाव के बल पर वन्यजीवों की तस्करी करते हैं और गांव में रहने वाले भोले-भाले लोगों को इससे जोड़कर रखते हैं। उन्हें बरगलाया जाता है और उन्हें छोटी मोटी राशि देकर गलत कार्य कराया जाता है। उपनिदेशक ने कहा कि गुड का कारोबार करने वाला व्यवसायी वन्यजीवों की तस्करी में शामिल पाया गया। उपनिदेशक के अनुसार पलामू टाइगर रिजर्व की सीमा छत्तीसगढ़, पलामू, गढ़वा और लातेहार में फैली हुई है। पलामू की इलाके से रेल और सड़क के कनेक्टिविटी आसान है। पलामू टाइगर रिजर्व से वन्य जीवों की तस्करी के बाद कोलकाता, वाराणसी और बिहार के इलाके में ले जाया जाता है। वाराणसी और बिहार के इलाके से नेपाल, जबकि कोलकाता के इलाके से वन्य जीव को बांग्लादेश में तस्करी की जाती है। बांग्लादेश के रास्ते वन्य जीव साउथ ईस्ट एशिया तक जाती है। भारत, चीन, साउथ एशिया में अंधविश्वास, मेडिसिन सहित कई मामलों को लेकर वन्य जीवों के अंगों का करोड़ों में कारोबार होता है। झारखंड में बरामद रेट सेंड हुआ को साउथ ईस्ट एशिया में बेचा जाना था। इसी तरह पैंगोलिन के स्कल और सांप के जहर का इस्तेमाल मेडिसिन के लिए होता है, जबकि बाघ एवं तेंदुआ के अंग का इस्तेमाल अंधविश्वास के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि शिकारियों को नेटवर्क चीन और साउथ ईस्ट एशिया तक फैला हुआ है।
