ऐतिहासिक उपलब्धि: उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल ने कश्मीर घाटी के लिए खाद्यान्न (चावल) की पहली पूर्ण रेलवे रैक का किया सफल संचालन

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Eksandeshlive Desk

​नई दिल्ली : कश्मीर घाटी की खाद्य सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल ने पंजाब के संगरूर रेल टर्मिनल से अनंतनाग गुड्स शेड तक खाद्यान्न (चावल) की पहली पूर्ण रेलवे रैक के आगमन को सफलतापूर्वक सुगम बनाया है। ​इससे पहले, घाटी में केवल ‘मिनी रैक’ (21 वैगन, 1384 टन क्षमता) ही प्राप्त होती थी। यह उपलब्धि उच्च-क्षमता वाले रेल परिवहन की दिशा में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने और परिवहन लागत को कम करने के उद्देश्य से भारतीय खाद्य निगम (FCI) के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद, इस पूर्ण रैक संचालन को हरी झंडी दी गई थी।

​मुख्य विशेषताएं

​दोगुनी क्षमता: इस पूर्ण रैक में 42 वैगन शामिल थे, जिसमें कुल 2,768 मीट्रिक टन चावल लाया गया है।
​त्वरित पारगमन: यह खेप 21 जनवरी को पंजाब के संगरूर रेल टर्मिनल से लोड की गई थी और 24 घंटे से भी कम समय में अनंतनाग पहुंच गई, जो आपूर्ति श्रृंखला में अभूतपूर्व दक्षता को दर्शाता है।
​चुनौतियों का सामना: कल खराब मौसम के कारण अनलोडिंग (माल उतारने) की गतिविधियों में मामूली देरी हुई, लेकिन आज हैंडलिंग कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।
​घाटी पर प्रभाव: यह मील का पत्थर कश्मीर घाटी में वितरण नेटवर्क में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला साबित होगा। मिनी रैक और सड़क परिवहन के बजाय पूर्ण-क्षमता वाले रेलवे वैगनों को अपनाकर, रेलवे विभाग निम्नलिखित सुनिश्चित करता है:
​लागत दक्षता: समग्र लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई खर्चों में महत्वपूर्ण कमी।
​आपूर्ति में स्थिरता: घाटी में बफर स्टॉक बनाए रखने के लिए एक तेज़ और अधिक विश्वसनीय तरीका।
​पर्यावरणीय लाभ: राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी ट्रक यातायात पर निर्भरता में कमी।
​यह सफल संचालन जनता तक आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए रेलवे, एफसीआई (FCI) और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के बीच बेहतरीन समन्वय का प्रमाण है।

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