Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : दिवंगत असमिया गायक और सांस्कृतिक आइकन जुबीन गर्ग के परिवार ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालत के गठन और सुनवाई को फास्ट-ट्रैक किए जाने की मांग की है। परिवार ने यह भी आग्रह किया है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी आरोपी को जमानत न दी जाए। परिवार की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि जुबीन गर्ग का सितंबर 2025 में सिंगापुर में हुआ असामयिक निधन केवल एक परिवार की क्षति नहीं है बल्कि असम और पूर्वोत्तर भारत के करोड़ों लोगों के लिए गहरा आघात है, जो अब भी सत्य और कानूनी कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
पत्र में बताया गया कि घटना के तुरंत बाद सिंगापुर की एजेंसियों ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू की और भारतीय उच्चायोग ने पोस्टमार्टम सहित संबंधित प्रक्रियाओं में समन्वय किया। इसके बाद असम में सीआईडी के पास प्राथमिकी दर्ज कराई गई और राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। करीब तीन महीने की जांच के बाद एसआईटी ने 2,500 से अधिक पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया है, जिसमें हत्या से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। परिवार ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष अदालत का गठन किया जाए, आवश्यकता पड़ने पर वरिष्ठ और अनुभवी अभियोजकों की अतिरिक्त नियुक्ति की जाए तथा सुनवाई में किसी भी तरह की देरी से बचने के लिए प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर उचित कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही सिंगापुर में चल रही कोरोनर कोर्ट की कार्यवाही पर उच्च स्तर पर निगरानी रखने, सभी साक्ष्य और दस्तावेज भारतीय एजेंसियों को उपलब्ध कराने तथा आपसी कानूनी सहयोग के सभी वैधानिक विकल्पों को अपनाने की भी मांग की गई है। पत्र पर जुबीन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग, बहन पाल्मी बोरठाकुर और चाचा मनोज कुमार बोरठाकुर के हस्ताक्षर हैं। परिवार ने कहा है कि वे शोकाकुल जरूर हैं, लेकिन एक ऐसे गणराज्य के नागरिक भी हैं जो न्याय, गरिमा और कानून के शासन में विश्वास करता है।
