राष्ट्रपति के अभिभाषण में भारत की विकास यात्रा और भविष्य की दिशा स्पष्ट : प्रधानमंत्री

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को संसद के बजट सत्र की शुरुआत पर दोनों सदनों को राष्ट्रपति के संबोधन की सराहना करते हुए कहा कि यह संबोधन व्यापक, प्रेरक और दूरदर्शी रहा। राष्ट्रपति का संबोधन हाल के वर्षों में भारत की उल्लेखनीय विकास यात्रा को दर्शाने के साथ-साथ भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा भी तय करता है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि संसदीय परंपराओं में राष्ट्रपति का संबोधन विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह आने वाले महीनों में देश की विकास यात्रा को दिशा देने वाले नीतिगत संकल्पों को सामने रखता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संबोधन देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने में मार्गदर्शक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के संबोधन में ‘विकसित भारत’ के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया, जो मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण की हमारी साझा आकांक्षा को प्रतिबिंबित करता है। मोदी ने कहा कि संबोधन में सुधारों की रफ्तार को और तेज करने, नवाचार तथा सुशासन पर जोर देने की सामूहिक प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति के संबोधन में किसानों, युवाओं, गरीबों और वंचित वर्गों के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का भी उल्लेख किया गया, जो समावेशी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भाजपा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्ष की नारेबाजी को संसद का अपमान बताया : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संसद के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी को संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने पत्रकारों से कहा कि जिस तरह से आज फिर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने आदतन संसदीय मर्यादा को तार-तार किया, उसकी जितनी भी निंदा की जाय, कम है। आज जब राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में अभिभाषण दे रहीं थी और अपने अभिभाषण में वंदे मातरम का 150वां साल मनाये जाने की बात कर रही थीं, बंगाल की धरती से स्वतंत्रता के उद्घोष और अमर मनीषी बंकिम बाबू के कृतित्व को याद कर नमन कर रहीं थीं तो कांग्रेस और इंडी गठबंधन के अन्य घटक दलों के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। ऐसा कर के उन्होंने वन्देमातरम राष्ट्र गीत का अपमान किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने ऋषिपुरुष बंकिम बाबू का भी अपमान किया। इस दृश्य को पूरे देश ने देखा है। मुझे समझ में नहीं आता कि वंदे मातरम्, बंकिम बाबू और पश्चिम बंगाल की धरती से कांग्रेस और इंडी गठबंधन को इतनी नफरत क्यों है? आश्चर्य की बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस भी विपक्षी हंगामे में साझेदार बन रही थी। इन लोगों ने संसद की गरिमा को जिस तरह ठेस पहुंचाया है। वह अति निंदनीय है। इसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए वो कम है। इन लोगो को संसद और देश से माफ़ी मांगनी चाहिए।

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