Reporting by Mustaffa
मेसरा (रांची): बीआईटी मोड़ और आसपास के गांवों की एकता के सूत्रधार,बीआईटी मोड़ दुर्गा पूजा समिति के पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक महेश्वर नारायण (62) अब यादों में शेष रह गए हैं। गुरुवार को मिशन हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से मेसरा और केदल पंचायत क्षेत्र ने न केवल एक समाजसेवी,बल्कि एक ऐसा छायादार वृक्ष खो दिया है,जिसकी देखरेख में सामाजिक परंपराएं पुष्पित-पल्लवित होती थीं।
“श्रद्धा का उमड़ा जनसैलाब”
जैसे ही उनके पार्थिव शरीर की अंतिम यात्रा निकली,पूरा क्षेत्र नम आंखों से भर उठा। समाज के हर वर्ग के लोग उनकी अंतिम विदाई में शामिल होने पहुंचे। जुमार नदी के तट पर जब उनकी चिता को मुखाग्नि दी गई,तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। दो मिनट के सामूहिक मौन ने उनकी कर्मठता और मिलनसार स्वभाव को मौन श्रद्धांजलि दी। होम्बई गांव निवासी महेश्वर नारायण का नाम बीआईटी मोड़ दुर्गा पूजा का पर्याय बन चुका था। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे केवल एक अध्यक्ष नहीं थे,बल्कि पूजा के दौरान हर छोटी-बड़ी व्यवस्था को भक्ति और अनुशासन से सींचने वाले शिल्पी थे। बीमारी के बावजूद सामाजिक कार्यों के प्रति उनका जज्बा कभी कम नहीं हुआ।
“महेश्वर जी का जाना एक युग का अंत है। उनका शांत चेहरा और सेवा भाव हमारे लिए हमेशा प्रेरणा रहेगा।” — समिति के भावुक सदस्य।
वे अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार और उन अनगिनत लोगों का प्यार छोड़ गए हैं,जिनके लिए वे एक सच्चे मार्गदर्शक थे। मेसरा के सामाजिक इतिहास में उनकी कमी हमेशा खलेगी।
