ट्रेड यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल का झारखंड में दिखा मिलाजुला असर

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Eksandeshlive Desk

रांची : संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच के आह्वान पर गुरुवार को देशव्यापी आम हड़ताल का राज्य भर में मिलाजुला असर देखने को मिला। हड़ताल के दौरान संयुक्त ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर राजधानी रांची के मेन रोड स्थित अल्बर्ट एक्का चौक पर संगठनों के कार्यकर्ता बैनर-पोस्‍टर लेकर केंद्र सरकार की नीतियों का जोरदार विरोध किया। यूनियनों की ओर से अल्बर्ट एक्का चौक पर रास्ता रोको कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सैकडों मजदूर-कर्मचारी शामिल हुए। रांची में शहर में हड़ताल का व्यापक असर देखा गया, जबकि दूसरे जिलों में भी हड़ताल का असर देखा गया। इधर, राज्य भर में जरूरी सेवाओं को छोड़कर कोयला, इस्पात, तांबा, बाक्साइट, माईका, पत्थर और लौह अयस्क की खदानों में खनन कार्य ठप रहा। बैंक, बीमा, निर्माण, फार्मा, ट्रांसपोर्ट, सीमेंट, इंजीनियरिंग और बीड़ी उद्योग सहित संगठित क्षेत्र के स्थायी और आउटसोर्सिंग कामगारों ने हड़ताल में भाग लिया। असंगठित क्षेत्र में भी असर देखा। हड़ताल से निजी क्षेत्र के कल-कारखानों में उत्पादन प्रभावित हुआ। इसके अलावा केंद्रीय और राज्य सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मध्यान्ह भोजन योजना के कामगार, परियोजना कर्मी और बड़ी संख्या में स्कीम वर्करों ने भी हड़ताल में सक्रिय भागीदारी निभाई। झारखंड में लाखों मजदूर हड़ताल में शामिल हुए। हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन प्राप्त था। वहीं वामदल और इंडिया गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों ने राज्य भर में दो घंटे के रास्ता रोको कार्यक्रम आयोजित कर समर्थन दिया।

ट्रेड यूनियनों की मांगें : चारों लेबर कोड को रद्द कर पुराने श्रम कानून बहाल करने के अलावा मनरेगा को सशक्त रूप में पुनः लागू करने की मांग की गई। बीज विधेयक, वीबी-जी राम-जी अधिनियम-2025, बिजली संशोधन विधेयक-2025, सबकी सुरक्षा-सबका बीमा विधेयक 2025 और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025 को अविलंब वापस लेन की मांग उठाई गई। वहीं सम्मानजनक रोजगार, न्यूनतम मजदूरी की कानूनी गारंटी, यूनियन बनाने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के पक्ष में आवाज बुलंद की गई। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा और पेंशन की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। इसके साथ ही सभी के लिए खाद्य, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास की गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की गई है। वहीं मौके पर संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच की ओर से कहा गया कि यह हड़ताल संदेश देती है कि मजदूर-किसान विरोधी नीतियों को देश की जनता स्वीकार नहीं करेगी। यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी जारी रखी तो आंदोलन और व्यापक तथा तेज किया जाएगा। मौके पर एटक, एक्टू, सीटू, किसान सभा, खेत मजदूर यूनियन, आदिवासी अधिकार मंच, आईसा, अराजपत्रित कर्मचारी के प्रकाश विप्लव, महेंद्र पाठक, मनोज भक्त, शुभेंदु सेन, नंदिता भट्टाचार्य, अजय सिंह, प्रतीक मिश्रा, प्रफुल्ल लिंडा, सुखनाथ लोहरा, एस के रॉय, बीरेंद्र कुमार, बीना लिंडा, संजीव सिन्हा, नवीन चौधरी और सुनील साहू शामिल थे।

ट्रेड यूनियनों के हडताल को लेकर वाम दलों ने केंद्र की नीतियों का किया विरोध : राजधानी रांची में वाम दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त आह्वान पर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध किया गया। इस दौरान भारत–अमेरिका ट्रेड डील और श्रम कानूनों को कमजोर करने के विरोध में अल्बर्ट एक्का चौक को जाम कर प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में भाकपा माले के राज्य सचिव, मनोज भक्त के नेतृत्व में भाकपा माले, प्रकाश बिप्लव के नेतृत्व में माकपा, महेंद्र पाठक के नेतृत्व में भाकपा के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की। वहीं इस दौरान कई सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता हडताल के विरोध में सडकों पर उतरे। मौके पर प्रदर्शनकारियों ने चार लेबर कोड वापस लो, वीबी-जी राम-जी योजना वापस लो, अमेरिका परस्त नीति बंद करो के नारे लगाए। वहीं इस दौरान आम लोगों में इससे संबंधित पर्चा वितरित किया गया, जिनमें केंद्र सरकार की नीतियों से मजदूरों और किसानों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को विस्तार से रखा। इसके बाद अल्बर्ट एक्का चौक से कचहरी चौक तक मार्च निकाला गया। वहीं अल्‍बर्ट एक्‍का चौक पर आयोजित सभा सभा को संबोधित करते हुए मनोज भक्त ने कहा कि केंद्र सरकार कॉरपोरेट हितों की रक्षा में देश के श्रम कानूनों को खत्म कर रही है और सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंप रही है। चार लेबर कोड के जरिए मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला किया जा रहा है, जबकि किसानों के हितों की अनदेखी कर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए रास्ता साफ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत–अमेरिका ट्रेड डील देश की आर्थिक संप्रभुता पर आघात है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। मौके पर संयुक्त मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार मजदूर–किसान विरोधी नीतियों को वापस नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कार्यक्रम में एक्टू के राज्य महासचिव शुभेंदु सेन, अनंत प्रसाद गुप्ता, मंजू देवी, सुनील साह, नवीन चौधरी, त्रिलोकी नाथ, नंदिता भट्टाचार्य, अजय सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।

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