Eksandeshlive Desk
रांची : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर एचईसी, धुर्वा स्थित पुराना विधानसभा मैदान में शिवशिष्यों द्वारा भगवान शिव की पूजा-अर्चना के साथ आयोजित अहर्निश शिव संकीर्तन अष्टयाम का भव्य समापन हुआ। “हर भोला, हर शिव” के जयघोष और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। अष्टयाम के दौरान निरंतर भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और शिव महिमा के गुणगान से श्रद्धालु आध्यात्मिक आनंद में डूबे नजर आए। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ होली भी खेली। “भगवान दिगंबर खेले होली” जैसे पारंपरिक भजनों पर महिलाएं, पुरुष और युवा भक्त झूमते दिखे। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अपने स्वास्थ्य की जांच कराई।
आयोजन समिति के अध्यक्ष शिव कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। दूर-दराज से आए भक्तों के लिए पेयजल, प्रसाद, बैठने और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की गई थी। प्रसाद वितरण के दौरान श्रद्धालु पंक्तिबद्ध होकर श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण करते नजर आए। साहब हरीन्द्रानंद जी के निवास (उपवन) में उनके दर्शनार्थ लंबी कतारें देखी गईं। भक्तगण अनुशासन के साथ अपनी बारी का इंतजार करते रहे, जिससे आयोजन की सुव्यवस्थित व्यवस्था की झलक स्पष्ट दिखाई दी। वैश्विक शिवशिष्य परिवार की ओर से भी निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाया गया। शिविर में होम्योपैथिक एवं एलोपैथिक पद्धति से विभिन्न रोगों की जांच कर दवाइयों का वितरण किया गया। चिकित्सकों ने श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी प्रदान किया। इसके अतिरिक्त नेत्र जांच एवं उपचार की विशेष व्यवस्था भी की गई, जिससे अनेक लोगों को लाभ मिला। कार्यक्रम में वैश्विक शिवशिष्य परिवार के मुख्य सलाहकार अर्चित आनंद ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है साथ ही उन्होंने बताया शिव चर्चा के सूत्रधार साहब हरिन्द्रानंद जी की इक्छा के अनुसार पूरे विश्व में शिव के गुरु स्वरूप को स्थापित करना है। अवसर पर शिवशिष्य हरिंद्रानंद फाउंडेशन की अध्यक्ष बरखा आनंद, शिवशिष्य परिवार के सचिव अभिनव आनंद, निहारिका आनंद सहित अन्य आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे। आयोजन के सफल संचालन में स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय योगदान दिया। भक्ति, सेवा और समर्पण से ओतप्रोत यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि सामाजिक एकता और आध्यात्मिक जागरण का भी प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर गया।
