गोवा समुद्री सम्मेलन 21 को, 14 देशों की नौसेनाएं सुरक्षा चुनौतियों पर करेंगी चर्चा

NATIONAL

नौसेना प्रमुख करेंगे मेजबानी, रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ होंगे मुख्य अतिथि

Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली : ​भारतीय नौसेना का गोवा समुद्री सम्मेलन 21 ​फरवरी को​ गोवा ​के नौसैनिक युद्ध महाविद्यालय में ​होगा। यह सम्मेलन हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) के समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों की सामूहिक बुद्धिमत्ता और परिचालन अनुभव को एक मंच पर ​लाएगा।​ सम्मेलन में समकालीन समुद्री चुनौतियों ​का समाधान ​निकालने के उद्देश्य से हिस्सा लेने वाली नौसेनाओं के संयुक्त प्रयासों पर चर्चा की जाएगी। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी 14 देशों के नौसेना प्रमुखों, समुद्री बलों के प्रमुखों तथा वरिष्ठ प्रतिनिधियों ​की मेजबानी करेंगे। इन देशों में बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, केन्या, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड और तंजानिया​ शामिल हैं। रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि होंगे।​ सम्मेलन में प्रख्यात वक्ता और विषय-विशेषज्ञ समुद्री सूचनाओं के वास्तविक समय में आदान-प्रदान और क्षमताओं को मजबूत करने के लिए संयुक्त प्रयासों पर चर्चा ​करेंगे। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश मुख्य भाषण देंगे।

इस वर्ष के सम्मेलन का विषय ​’हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री सुरक्षा चुनौतियां​-अवैध और अनियमित मत्स्य पालन तथा अन्य अवैध समुद्री गतिविधियों जैसे गतिशील खतरों को कम करने के लिए प्रयासों को आगे बढ़ाना’​ रखा गया है। यह विषय हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री देशों के बीच तालमेल, सहयोग और समन्वय अनिवार्य आवश्यकता को रेखांकित करता है।​ प्रत्येक दो वर्ष में होने वाले इस सम्मेलन के माध्यम से समुद्री पड़ोसी देशों के साथ सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की जाती है और समग्र क्षमता निर्माण के लिए साझा मार्ग निर्धारित किए जाते ​हैं। नौसेना ​के कैप्टन विवेक मधवाल ने बताया कि समुद्री क्षेत्र को पारंपरिक एवं अपारंपरिक दोनों प्रकार की चुनौतियों का सामना कर​ना पड़ रहा है, जिनका क्षेत्रीय सुरक्षा और आजीविका पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। समुद्री आतंकवाद, तस्करी, अवैध, अनियमित और बिना सूचना के मछली पकड़ना, समुद्री डकैती, सशस्त्र डकैती और अनियमित प्रवासन जैसे खतरे सुरक्षित समुद्र के लक्ष्य को लगातार कमजोर कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, साइबर खतरे और अवैध जहाजरानी जैसी उभरती चुनौतियां इन जोखिमों को और बढ़ा देती हैं। इन खतरों की अंतरराष्ट्रीय और बहुआयामी प्रकृति को देखते हुए भागीदार देशों के बीच बेहतर और प्रभावी सहयोगात्मक तंत्र की आवश्यकता है।

Spread the love