Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई एम्पैक्ट शिखरवार्ता में गुरुवार को वैश्विक नेताओं के समक्ष एआई के नैतिक उपयोग को लकेर तीन सुझाव दिए। इसमें डेटा स्वायत्तता, पारदर्शी नियम और मानवीय मूल्य शामिल रहे। विश्व नेताओं के साथ शिखर सम्मेलन के दौरान पूर्ण सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शुरुआती वक्तव्य में विश्वास जताया कि यह सम्मेलन वैश्विक एआई इकोसिस्टम के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि हमें मिलकर इस ‘डिसरप्शन’ को मानवता के सबसे बड़े अवसर के रूप में बदल देना है। नैतिक उपयोग के समुझों पर उन्होंने कहा कि डाटा के मालिकाना हक को सम्मान मिलना चाहिए। एआई ट्रेनिंग के लिए एक डाटा फ्रेमवर्क बनाना चाहिए। डाटा सुरक्षित संतुलित विश्वसनीय होना चाहिए। इसलिए ग्लोबल ट्रस्टेड डाटा फ्रेमवर्क जरूरी है। उन्होंने कहा कि एआई प्लेटफार्म अपने सेफ्टी रूल्स बहुत क्लियर और ट्रांसपेरेंट रखें। हमें ब्लैक बॉक्स के बदले ग्लास बॉक्स अप्रोच चाहिए। जहां सेफ्टी रूल्स देखें और वेरीफाई किए जा सके तब अकाउंटेबिलिटी भी क्लियर होगी और बिजनेस में एथिकल बिहेवियर को भी बूस्ट मिलेगा।
एआई रिसर्च में पेपर क्लिप प्रॉब्लम का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई को क्लियर ह्यूमन वैल्यूस और गाइडेंस की जरूरत है। टेक्नोलॉजी पावरफुल है लेकिन डायरेक्शन हमेशा मानव ही तय करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई में नैतिक व्यवहार का दायरा बहुत बड़ा है। ऐसे में एआई के लिए हमें एथिकल बिहेवियर और नॉर्म्स का दायरा भी असीमित बनाना होगा। एआई कंपनियों के सामने बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। लाभ के साथ-साथ उद्देश्य पर भी ध्यान केन्द्रित करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत के लिए टेक्नोलॉजी पावर का नहीं बल्कि सेवा का माध्यम है। ‘पावर नहीं एंपावर करना।’ एआई की दिशा भी ऐसी होनी चाहिए जैसे पूरी मानवता का कल्याण हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत बुद्ध की धरती है और भगवान बुद्ध ने कहा था ‘राइट एक्शन कम्स फ्रॉम राइट अंडरस्टैंडिंग’। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि हम साथ मिलकर ऐसा रोड मैप बनाएं जिससे एआई का सही प्रभाव दिखे। यह तभी आता है जब हम सही समय पर सही नियत से सही निर्णय लेते हैं। वैश्विक महामारी कोविड का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे दुनिया को एहसास हुआ कि एक दूसरे के साथ खड़े होने से असंभव भी संभव हो जाता है। वैक्सीन विकास से लेकर सप्लाई चेन तक डाटा साझा करने से लेकर जीवन बचाने तक सहयोग ने ही समाधान दिया। टेक्नोलॉजी कैसे मानवता की सेवा का माध्यम बन सकता है यह हमने भारत में कोविड काल में देखा है। प्रधानमंत्री ने माना कि पहले तकनीक भेदभाव का कारण बनी है और कहा कि अब एआई टेक्नोलॉजी को सबके लिए सुलभ और पहुंच में बनाना होगा। हमें ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं को भी एआई गवर्नेंस के केंद्र में रखना होगा।प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई की ग्लोबल जर्नी में एस्पिरेशनल इंडिया एआई की बड़ी भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि अपने इस दायित्व को समझते हुए ही भारत आज बड़े कदम उठा रहा है। अपने एआई मिशन के माध्यम से आज भारत में 38,000 जीपीएल मौजूद हैं। अगले 6 महीनों में हम 24,000 जीपीयूस और लगाने जा रहे हैं। हम अपने स्टार्टअप्स को बहुत ही अफोर्डेबल रेट्स पर वर्ल्ड क्लास कंप्यूटिंग पावर उपलब्ध करा रहे हैं। हमने एक एआई कोस्ट भी बनाया है। इसके माध्यम से 7500 से अधिक डाटा सेट्स और 270 एआई मॉडल्स को नेशनल रिसोर्स के रूप में शेयर किया गया है।
