Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर होने और अप्रैल में इसके लागू होने की संभावना जताई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) निर्यात को बढ़ावा देने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन को लॉन्च किया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि भारत के ब्रिटेन और ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अप्रैल में लागू होने की उम्मीद है। पीयूष गोयल ने कहा कि न्यूजीलैंड के साथ समझौता सितंबर में लागू हो सकता है। भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि ईयू के सभी 27 देश इस बात के लिए उत्सुक हैं कि एफटीए को जल्द ही फाइनल किया जाए और आगे बढ़ाया जाए। गोयल ने कहा कि यह समझौते 140 करोड़ भारतीयों की ताकत है। भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए तीन दिवसीय बैठक 23 फरवरी से अमेरिका में शुरू होगी। इस महीने की शुरुआत में भारत-अमेरिका ने एक संयुक्त बयान में घोषणा की थी कि अंतरिम व्यापार समझौते के लिए रूपरेखा तय कर ली गई है।
भारत-अमेरिका के अधिकारी 23 फरवरी से बैठक करके व्यापार समझौते को देंगे कानूनी मसौदा का रूप : भारत और अमेरिका के अधिकारी अंतरिम व्यापार समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए 23 फरवरी से अमेरिका में तीन दिवसीय बैठक करेंगे। इस बैठक में समझौते की रूपरेखा को औपचारिक दस्तावेज में बदला जाएगा। इस महीने की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह घोषणा की थी कि अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा तय कर ली गई है। संयुक्त बयान में समझौते की मुख्य रूपरेखा तय की गई थी। अब इन बिंदुओं को एक औपचारिक कानूनी समझौते में बदलने के बाद दोनों पक्षों में अगले माह हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। भारतीय दल का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे। अंतरिम व्यापार समझौते के तहत दोनों पक्ष आपस में व्यापार किए जाने वाले कई वस्तुओं पर शुल्क रियायतें देंगे। अमेरिका ने घोषणा की है कि वह भारतीय वस्तुओं पर जवाबी शुल्क को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर देगा। इसके अलावा रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाए गए 25 फीसदी दंडात्मक शुल्क को पहले ही समाप्त किया जा चुका है।
