प्रार्थना की आड़ में धर्मांतरण का खेल, ग्रामीणों ने खदेड़ा

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परमेश्वर देंगे संतान और बीमारी से मुक्ति, झूठे वादों के जाल में फंसाए जा रहे थे बेगुनाह ग्रामीण
अशोक अनन्त

प्रतापपुर/चतरा: झारखंड के चतरा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके में सांप्रदायिक और सामाजिक हलचल तेज कर दी है। मामला प्रतापपुर थाना क्षेत्र के हुमाजांग़ पंचायत स्थित बसबूट्टा गांव का है। यहाँ काफी समय से बंद कमरों के भीतर ‘प्रार्थना’ के नाम पर धर्मांतरण का एक व्यवस्थित जाल बुना जा रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि बाहर से आए कुछ लोग गरीब, अशिक्षित और दलित परिवारों को निशाना बना रहे थे। साजिश का तरीका बेहद शातिर था। महिलाओं को पैसे का लालच दिया जाता था और यह दावा किया जाता था कि ‘बाइबल’ पढ़ने और ‘परमेश्वर’ की प्रार्थना करने से निःसंतानों को संतान मिलेगी और गंभीर बीमारियां जादू की तरह ठीक हो जाएंगी। गोविंद यादव के घर को इस गतिविधियों का केंद्र बनाया गया था, जहाँ आसपास के गांवों से महिलाओं को टेंपो और टोटो में भरकर लाया जा रहा था।
धनेसरी देवी ने बताया (स्थानीय महिला) -हमारे घर पर कुछ बाहर से लोग आए थे। बोले कि परमेश्वर की प्रार्थना करो, परिवार का ध्यान रखा जाएगा और पैसे भी मिलेंगे। बोले कि दुख दूर हो जाएगा। हमने साफ मना कर दिया। हमारा पूरा जीवन अपने देवी-देवताओं की पूजा में बीता है, हम धर्म नहीं बदलेंगे। रविवार को जब ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा, तो उन्होंने एकजुट होकर इस बैठक पर धावा बोल दिया। ग्रामीणों ने बाहर से आए पादरियों को रंगे हाथों पकड़ा और उनके ‘गंदे खेल’ का कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों के आक्रोश को देखकर पादरी और उनके सहयोगी वहां से दुम दबाकर भाग खड़े हुए।
हमें भी चंद रुपयों का लालच दिया गया। कहा गया कि पिता परमेश्वर की प्रार्थना करो और बाइबल पढ़ो, तो घर का दुख दूर होगा और खर्चा चलाने के लिए पैसे भी मिलेंगे। हमने उन्हें साफ कह दिया कि हम ये सब नहीं कर सकते। पकड़े गए लोगों में बिहार के इमामगंज थाना क्षेत्र के मल्हारी गांव का रहने वाला प्रयाग कुमार भी शामिल था, जिसने कैमरे पर अपनी मौजूदगी और प्रार्थना की बात स्वीकार की है।
प्रयाग कुमार (आरोपी प्रचारक): -मैं यहाँ एक नया घर बना था, उसी में प्रार्थना करने आया था। मैं बिहार के इमामगंज के मल्हारी से आया हूँ। हाँ, मैं परमेश्वर की प्रार्थना कर रहा था।

बसबूट्टा गांव के लोगों ने अब जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस से गुहार लगाई है कि ऐसे तत्वों को चिन्हित कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए, जो गरीबी का फायदा उठाकर लोगों की आस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति है और ग्रामीण अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए लामबंद हैं।

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