राष्ट्रीय एकता के प्रतीक थे सरदार पटेल: राज्यपाल

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  • सरदार पटेल की 150वीं जयंती मनायी गयी
  • सरदार पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और दूरदर्शी नेतृत्व से देश को एकजुट करने का ऐतिहासिक कार्य किया

राँची: राजधानी राँची के आर्यभट्ट सभागार में देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर सरदार पटेल स्मृति समिति द्वारा एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर “सरदार वल्लभभाई पटेल : विचार और विरासत” पुस्तक का विधिवत विमोचन किया गया। राज्यपाल गंगवार ने अपने संबोधन में कहा कि सरदार पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और दूरदर्शी नेतृत्व से देश को एकजुट करने का ऐतिहासिक कार्य किया, जो सदैव प्रेरणादायक रहेगा। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता के प्रतीक थे।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने अपने संबोधन में सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है। उन्होंने कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और देश की अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। राँची के विधायक सीपी सिंह ने भी अपने संबोधन में सरदार पटेल को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कश्मीर के संदर्भ में मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट नीति की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के आयोजक डॉ. राजाराम महतो ने समारोह को संबोधित करते हुए सरदार पटेल के विचारों को वर्तमान समाज के लिए प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का जीवन हमें एकता, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे उनके आदर्शों को अपनाकर समाज और देश के विकास में अपनी भूमिका निभाएँ। कार्यक्रम में राँची की महापौर रोशनी खलखो सहित अनेक गणमान्य अतिथि बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक एवं छात्र-छात्राएँ शामिल हुए, जिससे सभागार का वातावरण देशभक्ति और उत्साह से भर गया । उपस्थित सभी लोगों ने सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों पर चलने तथा देश की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

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