Eksandeshlive Desk
काठमांडू : नेपाल सरकार ने 10 वर्ष या उससे अधिक समय से निष्क्रिय पड़े बैंक खातों को सील करते हुए उसमें रहे में लगभग साढ़े 17 अरब रुपये सरकारी खाता में लाने का निर्देश दिया है। नेपाल राष्ट्र बैंक के गवर्नर विश्वनाथ पौडेल के अनुसार, इस वर्ष मार्च महीने के अंत तक निष्क्रिय खातों में कुल 1763 करोड़ रुपये जमा हैं। ऐसे खातों की संख्या 36 लाख 45 हजार 593 बताई गई है। पौडेल ने कहा कि सरकार ने इन सभी खातों को सील करते हुए इनमें जमा सभी रकम को सरकारी खाते में ले जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
निष्क्रिय खातों का विवरण हर वर्ष राष्ट्र बैंक को भेजना अनिवार्य : बैंक तथा वित्तीय संस्थान संबंधी ऐन के अनुसार, लंबे समय से निष्क्रिय खातों का विवरण हर वर्ष राष्ट्र बैंक को भेजना अनिवार्य है। इसी प्रावधान के तहत आर्थिक वर्ष 2025/26 तक बैंकों द्वारा भेजे गए विवरण के अनुसार यह आंकड़ा सामने आया है। नई सरकार के गठन के बाद पहली मंत्रिपरिषद् बैठक में स्वीकृत “शासकीय सुधार के 100 कार्यसूची” के 78वें बिंदु में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से निष्क्रिय बैंक खातों की राशि को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सरकारी कोष में लाने की बात कही गई है। गवर्नर पौडेल ने कहा “इसी के तहत यह राशि बैंक खातों से सरकारी कोष में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।” प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, निष्क्रिय खातों में औसत जमा राशि लगभग 5 हजार रुपये है, जो आम नागरिक के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब 10 वर्ष से पुराने खातों की राशि को सरकारी कोष में लाने के निर्णय के बाद लोगों में यह चिंता बढ़ गई है कि कहीं यह राशि जब्त तो नहीं हो जाएगी।
नेपाल में 100 से अधिक नए कानून लाने की तैयारी : नेपाल सरकार 100 से अधिक नए कानून बनाने और मौजूदा कानूनों में संशोधन करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए विषयों की पहचान का कार्य पूरा हो चुका है। सरकार के प्रवक्ता तथा शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल के मुताबिक कुल 103 नए कानूनों के विषय और संशोधन किए जाने वाले कानूनों की पहचान की गई है। उन्होंने बताया कि प्राथमिकता के आधार पर नए कानूनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद् के कार्यालय सहित सभी 22 मंत्रालय काम कर रहे हैं। पोखरेल ने जानकारी दी है कि कानून निर्माण की रूपरेखा और विधायी प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी हुई हैं या नहीं, इसका निरीक्षण कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों के मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। प्राथमिकता के आधार पर अन्य मंत्रालयों को कानून निर्माण के लिए निर्देश देने का काम भी यही मंत्रालय कर रहा है। 100 से अधिक नए कानूनों के निर्माण और संशोधन के लिए तैयार विषय सूची में से 40 से 45 विधेयकों को आगामी संघीय संसद के सत्र में पारित कराने की सरकार की तैयारी है।
