Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में अगले तीन साल बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार ने नशा मुक्त भारत के लिए रोडमैप तैयार कर लिया है। अगले तीन सालों के लिए हमें नशे से मुक्ती के लिए ‘रूथलेस अप्रोच’ के साथ आगे बढ़ना होगा। शाह ने राज्यों के पुलिस प्रमुखों और सचिवों के साथ बैठक में सामूहिक और संगठित प्रतिक्रिया तथा आधुनिक खुफिया सूचना आधारित कार्रवाई, प्रौद्योगिकी आधारित रणनीति तथा पूरे नेटवर्क को लक्ष्य बनाकर अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनसीओआरडी) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में हाइब्रिड मोड में 44 केन्द्रीय मंत्रालयों और विभागों के प्रमुख हितधारकों के साथ-साथ राज्य सरकारों और ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसियों के 108 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस दौरान गृह मंत्री ने ‘मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)’ जारी किया। साथ ही शाह ने एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025 जारी की और जम्मू एवं गुवाहाटी में नवनिर्मित एनसीबी आंचलिक कार्यालयों का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में शाह ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा, अर्थतंत्र सुरक्षा और युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए नशे के कारोबार पर संपूर्ण विजय जरुरी है। भारत नशे के कारोबार से जुड़े डेथ ट्रायंगल (म्यांमार, थाईलैंड और लाओस) और डेथ क्रिसन (अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान) के बीच स्थित है। इसके अलावा ड्रोन आधारित ड्रॉप्स, समुद्री मार्गों से कंटेनराइज कारगो, डार्क नेट, क्रिप्टो पेमेंट और ऑर्डर टू डिलीवरी मॉडल पार्सलों का उपयोग जैसे तरीकों से ड्रग के कारोबारियों के खिलाफ हमारी लड़ाई कठिन हो गई है। गृह मंत्री ने कहा कि नशे के कारोबार के खिलाफ हमारी लड़ाई समान्य नहीं होनी चाहिए। नार्को अपराधी आज टेक्नोलॉजी से सक्षम हैं। वह नेटवर्क आधारित बन चुके हैं और मल्टी डोमेन अपराध के रूप में भी आज हमारे सामने खड़े हैं। ये सभी चीजें ये लड़ाई को और कठिन बनाती है। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘रूथलेस अप्रोच’ की बात कही। आगे इसपर स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि हमें नशे के व्यापार करने वालों के प्रति ‘रूथलेस एप्रोच’ रखना है और ड्रग के शिकार बने लोगों के प्रति संवेदनशील एप्रोच रखना है। उनको अंगुली पकड़ कर हमें सही रास्ते पर ले जाने का काम करना होगा।
गृह मंत्री ने बताया कि सरकार ने वर्ष 2026-29 के लिए मादक पदार्थों के विरुद्ध कार्ययोजना (रोडमैप) तैयार की है। यह चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ प्रवर्तन, खुफिया जानकारी और अभियान है। दूसरा अग्रदूत रसायनों (प्रीकर्सर) और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण है। तीसरा मांग में कमी और नुकसान की रोकथाम और चौथा स्तंभ क्षमता निर्माण, समन्वय और निगरानी है। उन्होंने कहा कि यह रोडमैप ‘समग्र सरकार’ और ‘समग्र समाज’ दृष्टिकोण पर आधारित है। इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के सभी विभागों के सचिवों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, ताकि नागरिकों को इस अभियान से जोड़कर इसके उद्देश्यों को सफल बनाया जा सके।
