रांची : अखिल भारतीय संपूर्ण क्रांति राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष व झारखण्ड मजदूर मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सूरज मंडल ने कहा है कि झारखण्ड की हेमंत सरकार कहने को तो हमेशा बाहरी-भीतरी, मूलवासी-आदिवासी जैसे राग अलापती रहती है लेकिन उसने वास्तव में आदिवासी और मूलवासियों की जैसी घनघोर उपेक्षा की है, वैसा आज तक कभी भी किसी सरकार में नहीं हुआ। सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्ग की इस उपेक्षा को लोग याद रखेंग । डॉ। मंडल ने कहा कि अभी भी जिन चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की गयी है उसमें यदि दो को छोड़ दिया जाये तो सभी मूलत: बाहर के ही हैं। डॉ। मंडल ने कहा कि सत्ता से चिपके रहने के लिये सरकार ने आदिवासी और मूलवासियों को अपनी कार्य संस्कृति की बजाय अपना स्लोगन बना लिया है जिसके आधार पर वह पूरे झारखण्ड के आदिवासियों और मूलवासियों को दिग्भ्रमित करने का प्रयास करती रहती है। उन्होंने कहा कि अफसोस की बात तो यह है कि इसमें उसे बहुत हद तक सफलता भी मिलती है।डॉ. मंडल ने कहा कि यह केवल सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का मामला नहीं है। बल्कि जिस संस्था से लोग सटीक सूचनाओं को प्राप्त करने तथा भ्रष्टाचार और सरकारी कार्य प्रणाली की अव्यावहारिक संस्कृति पर रोक लगाने की अपेक्षा करते हैं वहाँ वैसे लोगों की नियुक्ति की गयी है जो वास्तव में झारखण्ड के आम लोगों के दुख-दर्द से दूर हैं साथ ही उनमें से अधिकांश के जीवन और कार्य का व्यावहारिक अनुभव यही करता है कि उन्होंने अपने कैरियर को झारखण्ड के निर्माण की बजाय कहीं अधिक प्राथमिकता दी। डॉ मंडल ने कहा कि झारखण्ड की जनता इन सभी बातों को अच्छी तरीके से समझ रही है और वह समय आने पर इसका सटीक जवाब देगी।
