यमन ने जवाबी हमले में सऊदी अरब के औद्योगिक ठिकानों पर दागीं मिसाइलें

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Eksandeshlive Desk

सना/रियाद : सऊदी अरब और यमन के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। यमन की सेना ने सऊदी अरब के जिज़ान क्षेत्र में औद्योगिक ठिकानों पर मिसाइल हमले करने का दावा किया है। यमन का कहना है कि यह कार्रवाई अल-हुदैदा और कामरान द्वीप पर सऊदी हवाई हमलों के जवाब में की गई है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार आ रही चेतावनियों ने क्षेत्र में संघर्ष और तेज होने की आशंका बढ़ा दी है। ईरान की समाचार एजेंसी फ़ारस व अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार तड़के हुए इन हमलों से पहले सऊदी सेना ने पश्चिमी यमन के अल-हुदैदा स्थित एक ठिकाने और कामरान द्वीप पर कई हवाई हमले किए थे। यमन का दावा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सऊदी लड़ाकू विमानों को उसके हवाई क्षेत्र से बाहर जाने पर मजबूर कर दिया। हमलों के बाद यमन के विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि इस सैन्य कार्रवाई के परिणामों की पूरी जिम्मेदारी रियाद सरकार की होगी। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि यमन पर लंबे समय से लगी नाकेबंदी हटाने की मांग पर विचार करने के बजाय सऊदी अरब ने सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि अल-हुदैदा पर हमला क्षेत्रीय तनाव को नए स्तर पर ले जाएगा और अब “हमले के जवाब में हमला” की नीति अपनाई जाएगी। वहीं, यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के वरिष्ठ नेता हज़ेम अल-असद ने भी सऊदी अरब को चेतावनी देते हुए कहा कि “बंदरगाह के बदले बंदरगाह, हवाई अड्डे के बदले हवाई अड्डा और हर हमले का जवाब उससे भी बड़े हमले से दिया जाएगा।” इससे पहले यमन की सेना ने घोषणा की थी कि वह सऊदी ठिकानों के खिलाफ अपने नौसैनिक अभियान जारी रखेगी। सेना ने कहा था कि लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाने की कार्रवाई उसकी “नाकेबंदी के बदले नाकेबंदी” नीति का हिस्सा है। यमन ने इसी महीने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करने की घोषणा भी की थी। सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने चेतावनी दी थी कि सऊदी अरब की ओर से किसी भी नए हमले का जवाब “व्यापक और कठोर कार्रवाई” से दिया जाएगा।

सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन का यमन में हवाई हमला, होदेइदाह के हूथी सैन्य ठिकाने बने निशाना

लाल सागर में सऊदी-संबंधित जहाजों पर हुए हमलों और समुद्री तनाव के बीच सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के हूथी-नियंत्रित होदेइदाह प्रांत में सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। गठबंधन ने कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना था, जिनका इस्तेमाल वाणिज्यिक जहाजों को धमकाने और समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए किया जा रहा था। रूस की अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे (आरटी) तथा तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू के मुताबिक गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-माल्की ने बताया कि अभियान अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुरूप चलाया गया और होदेइदाह बंदरगाह को निशाना नहीं बनाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि होदेइदाह, रास ईसा और अल-सलीफ सहित यमन के सभी प्रमुख बंदरगाह समुद्री आवाजाही के लिए खुले हैं। दूसरी ओर, हूथी समूह के अल-मसीराह टीवी ने दावा किया कि हमलों में होदेइदाह प्रांत की दूरसंचार सुविधाओं और लाल सागर स्थित कामरान द्वीप को निशाना बनाया गया। समूह के अनुसार, हमले में एक महिला घायल हुई, जबकि उसकी राजनीतिक शाखा ने कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि वह “बढ़ते तनाव का जवाब और अधिक तनाव से” देगा। हमलों के कुछ समय बाद सऊदी अरब के औद्योगिक शहर जाज़ान पर हूथी के जवाबी हमले की भी खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी तेल कंपनी अरामको की एक सुविधा में आग लग गई। इससे पहले हूथियों ने दावा किया था कि उन्होंने इस सप्ताह सऊदी स्वामित्व वाले दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया। सऊदी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि एक टैंकर में आग लगी थी, जबकि दूसरे जहाज को मामूली नुकसान पहुंचा। हाल के दिनों में हूथी समूह ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी-संबंधित जहाजों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। समूह का कहना है कि यह कदम यमन पर जारी “घेराबंदी” के जवाब में उठाया गया है। इसके बाद सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और जहाजों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की घोषणा की। यमन में संघर्ष 2014 में हूथियों द्वारा राजधानी सना पर कब्जे के बाद शुरू हुआ था। 2015 में सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। लंबे समय से जारी इस संघर्ष ने यमन में गंभीर मानवीय संकट को जन्म दिया है। गाजा युद्ध शुरू होने के बाद 2023 से हूथियों ने इजरायल और उससे जुड़े जहाजों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले शुरू किए थे, जिन्हें उन्होंने फिलिस्तीनियों के समर्थन में उठाया गया कदम बताया। हालांकि, मई 2025 में अमेरिका के साथ हुए समझौते के बाद इन हमलों में कुछ समय के लिए कमी आई थी। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूथियों के खिलाफ “कड़ी सैन्य कार्रवाई” की चेतावनी देते हुए उन्हें ईरान समर्थित संगठन बताया।

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