Eksandeshlive Desk
वाशिंगटन/बीजिंग/काठमांडू: बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित तिब्बत में स्थित गियिरोंग काउंटी में अभी भी भूस्खलन, मडस्लाइड (गीली मिट्टी के तेज प्रवाह) और जल आपदा का खतरा बना बरकरार है। अगले तीन दिनों तक बारिश होने की संभावना है। मडस्लाइड से लगातार कच्चे बांध निर्मित हो रहे हैं। यह चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के शिगात्से प्रिफेक्चर का एक हिस्सा है। यह काउंटी तिब्बत के दक्षिण-पश्चिमी भाग में नेपाल की सीमा से सटी हुई है। तिब्बत से बुधवार को आए विनाशकारी जल सैलाब से नेपाल में भारी जन-धन की तबाही हुई है। सीएनएन और शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने साफ किया है कि नेपाल और चीन के गियिरोंग काउंटी में आई भयावह बाढ़ हिमनद (ग्लेशियर) यानी बर्फ के विशाल और भारी पिंड के ढहने का नतीजा है। यूएसजीएस ने कहा कि यह भूगर्भीय हलचल इतनी जबरदस्त थी कि शुरू में इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप आंका गया। इस हलचल के बाद आसपास के भूकंप मापी केंद्रों, लंबी अवधि की भूकंपीय तरंगों और सैटेलाइट तस्वीरों के विस्तृत विश्लेषण से यह पता चला कि यह भूकंप नहीं, बल्कि ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव की घटना है।
संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के विश्व वन्यजीव कोष (वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड) के अनुसार, नेपाल के ग्लेशियर हर साल 15 मीटर (50 फीट) तक पीछे हट रहे हैं। इस तरह के बदलाव से पहाड़ों की ढलानें अस्थिर हो जाती हैं और बड़ी कमजोर झील बन जाती है। इनके टूटने से जल प्रलय तक आ जाती है। नेपाल के टूरिज्म बोर्ड के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक कम से कम 517 विदेशी नागरिक हैं। चीन ने कहा है कि उसकी सीमा के उस पार 260 विदेशी लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशियों के बारे में अभी भी पक्की जानकारी की पुष्टि की जा रही है, लेकिन उनमें से कुछ पर्यटक और कुछ तीर्थयात्री हैं। नेपाल ने कहा कि उसकी सीमा के उस पार सबसे अधिक लापता नागरिक भारत (178), अमेरिका (65), यूक्रेन (53), मलेशिया (51), ऑस्ट्रेलिया (35), यूनाइटेड किंगडम (33) और कनाडा (25) के हैं। नेपाल में लापता कई विदेशी नागरिक ट्रैकिंग या धार्मिक यात्रा पर थे। इस बीच चीन ने कहा कि चीन-नेपाल सीमा पर मौजूद मुख्य आपदा क्षेत्र ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट पर आपातकालीन बचावकर्मी पहुंच गए हैं। खराब मौसम और रास्तों के बंद होने की वजह से उन्हें पहुंचने में लगभग 22 घंटे की देरी हुई। चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी ने गुरुवार को बताया कि पोर्ट से लगभग 2.5 किलोमीटर दूर से ही सड़कों पर करीब 1.5 मीटर मोटी कीचड़ और मलबे की परत जमा है। सुबह करीब 8 बजे 141 बचावकर्मियों का पहला जत्था ग्यिरोंग पोर्ट पहुंचा। इसके साथ ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम एमआई-171 हेलीकॉप्टर भी आपदा स्थल पर पहुंच चुका है। चीन और नेपाल के बीच ट्रांसपोर्ट का एक अहम केंद्र होने के नाते यह पोर्ट बचाव कार्यों का मुख्य केंद्र बना हुआ है। चीन ने बताया है कि ग्यिरोंग काउंटी में 550 से ज्यादा लोग लापता हैं।
ग्यिरोंग काउंटी के एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि पोर्ट के आसपास दूरसंचार नेटवर्क अभी भी ठप है। वे अभी तक काउंटी के बड़े अधिकारियों या कल घटनास्थल पर गई बचाव टीमों से संपर्क नहीं कर पाए हैं। सरकारी मीडिया के अनुसार, इस इलाके में सैकड़ों बचावकर्मियों को भेजा गया है। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित गियिरोंग काउंटी में भूस्खलन, मडस्लाइड और आकस्मिक बाढ़ का खतरा टला नहीं है। अगले तीन दिनों तक बारिश होने की संभावना है। क्षेत्र में अस्थिर बांध बन रहे हैं। सरकारी ब्रॉडकास्टर के अनुसार दिखाए गए ताजा ड्रोन फुटेज में भूस्खलन से बनी जगह पर बड़ी झील बनती नजर आई है। गियिरोंग पोर्ट के पास लेकिन सीमा के नेपाली हिस्से में बनी यह नई झील फैलती हुई लग रही है। ब्रॉडकास्टर के अनुसार, इस झील में अनुमानित 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी है और यह ओवरफ्लो होने लगी है। अगले तीन दिनों में झील में और 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी आने की उम्मीद है। इसके टूटने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। मौसम खराब है। बचाव कार्यों में बाधा आ रही है। चीन की सेना की स्थानीय कमांड के चेन शी ने बुधवार शाम कहा कि पहाड़ की ढलानें कभी भी गिर सकती हैं। सड़क खड़ी चट्टानों के किनारे से होकर गुजरती है और एक और मडस्लाइड का खतरा बरकरार है। इस बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की खोज करने और बचाव के हर संभव प्रयास करने का आदेश दिया है।
