‘जल-जंगल-जमीन हमारा है’ के नारों से गूंजा चकला, चितरपुर कोल ब्लॉक के लिए ग्राम सभा का ग्रामीणों ने किया जोरदार विरोध
LATEHAR DESK
लातेहार/चंदवा: चंदवा प्रखंड की चकला पंचायत में सोमवार को प्रस्तावित चितरपुर कोल ब्लॉक के लिए भूमि अर्जन की प्रक्रिया के तहत आयोजित होने वाली ग्राम सभा का ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया।
ग्राम सभा के विरोध में चितरपुर, चकला, बरवाटोली, भुकुटोला, पड़ुवा समेत आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण चकला पंचायत भवन के समीप पहुंचे और जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों के हाथों में तख्तियां थीं और पूरा इलाका ‘जल, जंगल, जमीन हमारा है’, ‘कंपनी वापस जाओ’, ‘ग्राम सभा का उल्लंघन बंद करो’, ‘ओडिशा एलायंस स्टील कंपनी मुर्दाबाद’ और ‘किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे’ जैसे नारों से गूंज उठा। ओडिशा एलायंस स्टील प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित चितरपुर कोल ब्लॉक रिवाइज्ड कोल माइंस के लिए भूमि अर्जन की कार्रवाई के मद्देनजर चकला गांव में 31 अगस्त को ग्राम सभा आयोजित करने का आदेश जारी किया गया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद स्थानीय विस्थापित एवं प्रभावित ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। हालांकि, ग्रामीणों के पहुंचने से पहले ही चकला पंचायत की मुखिया पूनम रंजीता एक्का ने ग्राम सभा को स्थगित कर दिया था। ग्राम सभा स्थगित होने की समुचित जानकारी ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पाने के कारण बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए। मौके पर ग्रामीणों ने मुखिया से सवाल किया कि कंपनी के प्रतिनिधि और जिला प्रशासन के अधिकारी ग्राम सभा में क्यों नहीं पहुंचे। इस पर मुखिया ने बताया कि उन्होंने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए ग्राम सभा को स्थगित किया है और इसकी सूचना अपने स्तर से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया था। उन्होंने सूचना नहीं मिल पाने पर ग्रामीणों से खेद भी जताया।
‘अनुसूचित क्षेत्र में ग्रामीणों की सहमति जरूरी’
मुखिया पूनम रंजीता एक्का ने कहा कि चकला क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र में आता है। यहां आदिवासी ग्रामीणों की इच्छा और ग्राम सभा की प्रक्रिया के बिना किसी प्रकार की गतिविधि नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चकला क्षेत्र में हिंडालको द्वारा कोयला खनन से संबंधित कार्य ग्राम सभा की सहमति के बगैर आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने इसे संविधान एवं कानून की भावना का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इस मामले में सरकारी तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं। वहीं ग्रामीणों ने कहा कि जमीन उनके लिए सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी आजीविका, पहचान, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सहमति के बिना भूमि अर्जन की किसी भी कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कंपनी प्रतिनिधियों के नहीं पहुंचने से बढ़ी नाराजगी
प्रदर्शन के दौरान कंपनी के प्रतिनिधियों और भू-अर्जन पदाधिकारी के कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचने की बात सामने आई। इससे ग्रामीणों में और आक्रोश देखा गया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। हिंडालको की ओर से यह बात स्पष्ट नहीं हो पाई है कि ग्राम सभा हुई है या नहीं।
