एशिया-प्रशांत में बढ़ी हलचल, जापान की सैन्य तैनाती पर चीन ने जताया विरोध

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Eksandeshlive Desk

बीजिंग: चीन ने जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास और जापान द्वारा लंबी दूरी के रणनीतिक हमलावर हथियारों की तैनाती का कड़ा विरोध किया है। चीन ने चेतावनी दी है कि इस तरह के कदमों से क्षेत्र में हथियारों की होड़ और सैन्य टकराव का खतरा बढ़ सकता है। तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू और चीन का दैनिक अंग्रेजी समाचार पत्र ‘चाइना डेली’ के मुताबिक, चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जियांग बिन ने सोमवार को कहा कि जापान की ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं के साथ मिलकर ‘ओरिएंट शील्ड 26’ सैन्य अभ्यास कर रही है। यह अभ्यास 8 से 24 सितंबर तक जापान के होक्काइडो और कागोशिमा क्षेत्रों में आयोजित किया जा रहा है।

रिपोर्टों के मुताबिक, इस अभ्यास में पहली बार अमेरिका का टाइफॉन मिड-रेंज मिसाइल सिस्टम भी शामिल किया जा रहा है। चीन का कहना है कि इस तरह की तैनाती क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा रही है। जियांग बिन ने आरोप लगाया कि ‘सुरक्षा कवच’ के नाम पर इस अभ्यास का इस्तेमाल लंबी दूरी के हमलावर हथियारों की तैनाती को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे दूसरे देशों के वैध सुरक्षा हित प्रभावित होते हैं और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा होता है। उन्होंने कहा, “हम इसका कड़ा विरोध करते हैं।” इस सैन्य अभ्यास को लेकर रूस ने भी आपत्ति जताई है। 31 अगस्त को रूस ने जापान में होने वाले इस अभ्यास को लेकर रूस स्थित जापानी दूतावास के सामने विरोध दर्ज कराया था। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने 1 सितंबर को कहा था कि जापानी क्षेत्र में ऐसे हथियारों की तैनाती, भले ही वह सैन्य अभ्यास के नाम पर हो, रूस की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करेगी। उन्होंने इसे मॉस्को के लिए “बिल्कुल अस्वीकार्य” बताया और कहा कि रूस अपनी राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जवाबी कदम उठाएगा। चीन लंबे समय से एशियाई देशों में अमेरिकी मिड-रेंज मिसाइल सिस्टम की तैनाती का विरोध करता रहा है। वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मई में कहा था कि चीन टाइफॉन मिसाइल सिस्टम की तैनाती का कड़ा विरोध करता है।

गुओ ने टाइफॉन को एक रणनीतिक हमलावर हथियार बताते हुए कहा था कि इसकी तैनाती क्षेत्रीय रणनीतिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकती है और सैन्य टकराव तथा हथियारों की होड़ का खतरा बढ़ा सकती है। जियांग बिन ने जापान पर लंबी दूरी के हमलावर हथियार विकसित करने और विदेशों में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जापान की ये गतिविधियां उसके शांतिवादी संविधान और रक्षा-केंद्रित सुरक्षा नीति के सिद्धांतों के विपरीत हैं। उन्होंने जापान के सैन्य विस्तार को “मिलिटरीवाद के एक नए रूप” की ओर बढ़ता कदम बताया और चेतावनी दी कि इससे क्षेत्रीय तनाव तथा गुटों के बीच टकराव बढ़ सकता है। जियांग ने कहा, “जापान की सैन्य महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देने वाला कोई भी कदम क्षेत्र को एक खतरनाक भंवर में धकेल सकता है और अंततः खुद जापान को ही नुकसान पहुंचाएगा।” चीन ने जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से दूसरे देशों की सुरक्षा चिंताओं का सम्मान करने, अपनी नीतियों में सुधार करने और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है।

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