Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि ‘नो फीस ऑन यूपीआई’ की व्यवस्था को बदलकर दो हजार रुपये तक के यूपीआई लेनदेन को शुल्क मुक्त और उससे ऊपर शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने सरकार से पांच हजार रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10 हजार रुपये के लेनदेन पर 50 रुपये तक संभावित शुल्क की खबरों पर स्पष्टीकरण मांगा है। खरगे ने एक्स पोस्ट में कहा कि महंगाई के कारण आम आदमी की जेब पहले ही खाली है। थोक महंगाई करीब 10 फीसदी है और ऐसे समय में यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की व्यवस्था जनता की बचत पर अतिरिक्त बोझ डालेगी। खरगे ने नोटबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 10 साल पहले नोटबंदी के जरिए अर्थव्यवस्था को झटका दिया गया था। जब इसके नतीजों पर सवाल उठे तो सरकार ने इसे डिजिटल भुगतान और नकदी रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया कदम बताया था। खरगे ने कहा कि वित्त मंत्री ने हाल में संसद में कहा था कि यूपीआई पर कोई कर या शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इसके बावजूद उन्होंने कुछ मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या पांच हजार रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10 हजार रुपये के लेनदेन पर 50 रुपये तक संभावित वसूली की खबरें सही हैं। उन्होंने मर्चेंट डिस्काउंट रेट का जिक्र करते हुए कहा कि व्यापारी पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के जरिए आम उपभोक्ता से ही वसूला जा सकता है। महंगाई से परेशान जनता को राहत देने के बजाय सरकार उसकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने के नए तरीके खोज रही है।
यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की तैयारी का जयराम रमेश ने लगाया आरोप: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि संशोधित भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत जारी एक नई अधिसूचना से इस दिशा में कदम बढ़ाया गया है। जयराम रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि 6 अगस्त को कांग्रेस ने जिस आशंका को जताया था और जिस पर केंद्रीय वित्त मंत्री ने प्रतिक्रिया भी दी थी, अब सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। नई अधिसूचना में बैंकों और सेवा प्रदाताओं को केवल 2,000 रुपये से कम के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लेने से रोका गया है, लेकिन इससे अधिक राशि के लेनदेन को लेकर कोई स्पष्ट सुरक्षा नहीं दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे भविष्य में यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है। बाद में एक और अधिसूचना के जरिए सीमा में बदलाव भी किया जा सकता है और सरकार चाहें तो व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले सामान्य डिजिटल लेनदेन पर भी शुल्क लगा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे पर ईमानदारी और पारदर्शिता नहीं दिखाई है तथा डिजिटल भुगतान करने वाले लोगों के भरोसे को तोड़ा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है।
