Eksandesh Desk
हजारीबाग: स्थानीय नवाबगंज स्थित हजारीबाग आर्ष कन्या गुरुकुल आर्य समाज में चल रहे 14 वें वार्षिक महोत्सव पर शनिवार छठे दिन में सायंकाल की पवित्र बेला में तीन सौ बालक बालिकाओं का महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा रचित संस्कार विधि के आधार पर उपनयन संस्कार किया गया। नर्मदा पुरम मध्य प्रदेश से आए हुए यज्ञ के ब्रह्म स्वामी रितष् पति जी महाराज ने पूरे विधि विधान से उपनयन संस्कार को संपन्न कराया । आज प्रातः काल से ही विद्यार्थियों को नमकीन और मिर्च मसाले से रहित भोजन को अर्थात दुग्ध ,यवागु, फलाहार कराके उपवास कराया गया था जिससे कि उनका चित्त और हृदय पवित्र बना रहे। उपनयन संस्कार के अंतर्गत सभी विद्यार्थियों के माता-पिता और अभिभावक भी उपस्थित रहे ।
सभी माता-पिता ने और गुरुजनों ने अपने-अपने संतानों और शिष्यों के कंधों पर और हृदय के ऊपर हाथ से स्पर्श करते हुए ऐसा उपदेश किया कि जिस प्रकार एक माता अपने गर्भ में गर्भस्थ शिशु की पूर्णतया रक्षा करती है उसी प्रकार एक आचार्य अपने शिष्य को तीन रात्रि पर्यंत पूरी विद्या जब तक समापन ना हो तब तक आचार्य अपने गर्भ में धारण करके उसे चरित्रवान विद्वान सदाचारी देशभक्त बनाता है। सोनीपत से पधारे सोनीपत हरियाणा से पधारे हुए वेद वेदंगों के उद्भट्ट विद्वान आचार्य प्रदीप शास्त्री जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिस प्रकार की चेष्टा एक आचार्य करता है जिस प्रकार की चेष्टा माता-पिता करते हैं उन सभी चेष्टाओं का प्रभाव बालको पर पड़ता है इसलिए माता-पिता को और गुरुजनों को अपनी चेष्टा पूर्णतया सुन्दर पवित्र रखनी चाहिए। किसी प्रकार की कुचेष्टा नहीं करनी चाहिए। जिससे कि शिष्यों पर अच्छा प्रभाव पड़ता रहे इस कार्यक्रम में कर्मठ समाजसेवी जीवन गोप बटेश्वर मेहता स्वामी ब्रह्मानंद मुनि नरेश अग्रवाल, मनोज कुमार ,सुनील अग्रवाल, संजय कुमार ,बबलू शर्मा ,धर्मेंद्र कुमार ,फकीरचंद आर्य, ओम प्रकाश आर्य, ओम प्रकाश गुप्ता ,सत्य प्रकाश आर्य, सुनीता अग्रवाल ,उपस्थित रहे ,आचार्य कौटिल्य ने सबका धन्यवाद ज्ञापित किया।