आर्ट ऑफ लिविंग ने भव्य सोमनाथ ज्योतिर्लिंग महा रुद्र पूजा के साथ अपने 45वें वर्ष का किया शुभारंभ

Religious

Eksandeshlive Desk

धनबाद : गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के उपस्थिति में आर्ट ऑफ लिविंग का 45वें वर्ष का उत्सव मनाया गया। दो करोड़ लोगों ने एक साथ पवित्र ‘कोलारु पदिगम’ का सामूहिक पाठ किया। 12 ज्योतिर्लिंगों और पंचभूत स्थलों का तीर्थ जल अर्पित किया। एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर संस्थान के झारखंड मीडिया प्रभारी अजय मुखर्जी ने यह जानकारी दी। मंदिरों की गूंजती घंटियों, तट से टकराती लहरों और देश के प्रतिष्ठित 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों, पंचभूत स्थलों व अमरनाथ और पशुपतिनाथ मंदिरों से आए विद्वान पुरोहितों के गूढ़ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच, रामेश्वरम आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा।

इस भव्य अनुष्ठान में गुरुदेव ने देश के सभी बारह ज्योतिर्लिंगों, अमरनाथ और पशुपतिनाथ मंदिरों से आए प्रख्यात पंडितों को एक मंच पर एकत्र किया। इन सभी पवित्र धामों से विधिपूर्वक लाए गए तीर्थ जल को पूजा में अर्पित किया गया, जो भारत की आध्यात्मिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक काशी विश्वनाथ, वाराणसी से पधारे पंडित रमणंद दुबे ने कहा, “यह महा रुद्र पूजा आने वाली पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी। गुरुदेव द्वारा सृजित यह दिव्य वातावरण और आध्यात्मिक ऊंचाई अभूतपूर्व है। ऐसा प्रतीत होता है मानो सभी बारह ज्योतिर्लिंग एक ही स्थान पर साक्षात उपस्थित हों।” विश्व के 180 से अधिक देशों में फैले लगभग दो करोड़ श्रद्धालुओं ने एक साथ इस स्तोत्र का उच्चारण किया। मंदिरों, घरों और सामुदायिक केंद्रों से उठी ये स्वर-लहरियां सीमाओं को लांघते हुए शांति और सद्भाव के लिए एक वैश्विक प्रार्थना में परिवर्तित हो गईं।

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