रांची : कुरमाली भाषा में NET/JRF उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के पीएचडी पंजीकरण में उत्पन्न समस्या पर राँची विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की गयी है। मंगलवार को रांची विश्वविद्यालय संयोजक अभिषेक शुक्ला विक्रम कुमार यादव, विशाल कुमार यादव एबम दर्जनों छात्र छात्राओं के नेतृत्व में रांची विश्वविद्यालय के कुलपति कक्ष का घेराव किया। घेराव कर रहे अबुआ अधिकार मंच के सदस्य एवं छात्र-छात्राओं का कहना था के कुरमाली भाषा-साहित्य में ठएळ/खफऋ पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण किए हुए छात्र-छात्राओं को राँची विश्वविद्यालय में पीएचडी पंजीकरण करवाने में गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण अनेक प्रतिभाशाली छात्रों का भविष्य अंधकारमय होने की स्थिति में पहुँच गया है। अबुआ अधिकार मंच के रांची विश्वविद्यालय संयोजक ने बताया कि वर्तमान में झारखंड राज्य में कुरमाली विषय के मात्र दो ही नियमित शिक्षक हैं, जिनमें से केवल एक ही शिक्षक शोध निर्देशन के योग्य हैं। उनकी शोध निर्देशन सीट पूर्णत: भर चुकी है, जिसके कारण नए शोधार्थियों का पंजीकरण रुक गया है। उन्होंने कहा कि जब से राँची विश्वविद्यालय ने कुरमाली सहित अन्य 8 भाषाओं मुंडारी, संताली, हो, खड़िया, खोरठा, पंचपरगनिया, नागपुरी, कुड़ुख को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय में सम्मिलित कर दिया है, तब से इन भाषाओं के शोधार्थियों को मानविकी संकाय संस्कृत, हिन्दी, उर्दू, बांग्ला एवं अन्य विषयों के शोध निदेशकों के अधीन पंजीकरण की अनुमति नहीं मिल पा रही है। जबकि पूर्व में संस्कृत एवं हिन्दी विषयों के प्राध्यापक कुरमाली शोधार्थियों का निर्देशन करते थे और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहता था। श्री शुक्ला ने आगे कहा कि पीएचडी की नियमावली में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में शोध निर्देशक की कमी हो तो शोधार्थी मानविकी संकाय संस्कृत, हिन्दी, उर्दू, बांग्ला, दर्शनशास्त्र, अंग्रेजी आदि के प्राध्यापकों के अधीन शोध कार्य कर सकते हैं। रांची विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष को विगत शुक्रवार को ही इस मामले से अवगत करवाया था। परन्तु विश्वविद्यालय के उदासीन रवैया के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जिसे विवस हो कर छात्र-छात्राओं ने कुलपति का घेराव किया। अभिषेक शुक्ला ने कहा कि NET/JRF उत्तीर्ण छात्रों को लगभग 2 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, जबकि ठएळ की वैधता अवधि केवल 3 वर्ष होती है। यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो इन छात्रों का भविष्य गंभीर संकट में पड़ जाएगा। लगभग 2 घंटे के घेराव एवं धरना प्रदर्शन के बाद कुलपति ने वार्ता के लिए परीक्षा नियंत्रक समेत विश्वविद्यालय के अन्य पदाधिकारी को भेजा। मौके पर मजूद रांची विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक एवं कूलानुशासन ने आश्वासन दिया की दशहरे से छुट्टी के पहले क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा के रिसर्च स्कॉलर की समस्या का समाधान हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि राँची विश्वविद्यालय प्रशासन शीघ्र ही कुरमाली विषय के NET/JRF उत्तीर्ण छात्रों को मानविकी संकाय के प्राध्यापकों के अधीन पीएचडी शोध कार्य करने की अनुमति नहीं देता है, तो अबुआ अधिकार मंच विश्वविद्यालय में धरना-प्रदर्शन, आंदोलन और तालाबंदी करने के लिए बाध्य होगा।
