अलविदा की आहट और इबादत का जोश: केदल में दस्तरख्वान पर सिमटा पूरा गांव!

Religious

Mustafa Ansari

मेसरा (रांची) : जैसे-जैसे माहे रमजान अपने आखिरी पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, बीआईटी मेसरा और आसपास के इलाकों में इबादत और भाईचारे की रौनक दोगुनी हो गई है। शुक्रवार को जब चौथे जुम्मे की नमाज अदा की गई, तो फिजाओं में दुआओं का ऐसा असर दिखा कि हर चेहरा अकीदत से सराबोर नजर आया। ​जामा मस्जिद केदल के इमाम मौलाना आफताब फजाहिरी ने जब मिम्बर से तकरीर शुरू की, तो उन्होंने मोमिनों को जोश से भर दिया। उन्होंने बड़े ही भावुक अंदाज में कहा,रहमत और बरकत के दो पड़ाव तो गुजर गए, अब अलविदा की आहट है। यह आखिरी अशरा जहन्नुम से आजादी का है, इसलिए सुस्ती छोड़िए और इबादत में पूरी जान लगा दीजिए। उनकी इस झकझोरने वाली अपील का असर मस्जिदों में उमड़ी भीड़ में साफ देखा गया।

इधर, ​शाम होते ही केदल गांव के मदरसे का नजारा किसी उत्सव जैसा था। तरावीह की नमाज मुकम्मल होने की खुशी में आयोजित दावत-ए-इफ्तार में जब सैकड़ों रोजेदार एक साथ दस्तरख्वान पर बैठे,तो ऊंच-नीच और फासले खुद-ब-खुद मिट गए। खजूर की मिठास और आपसी बातचीत के चटखारे ने शाम को यादगार बना दिया। ​इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में गांव के नौजवानों ने सुपरफास्ट सेवा दिखाई। अंजुमन कमेटी के सदर समीम आलम ने मुस्कुराते हुए कहा,रमजान का असली मजा ही सबको साथ लेकर चलने में है। हमारे युवाओं ने जिस लगन से परोसगारी की और व्यवस्था संभाली,वह काबिले तारीफ है। अगला पड़ाव रविवार को फिर सजेगी महफिल, अगर आप इस बार की दावत से चूक गए हैं, तो फिक्र न करें। रविवार को जामा मस्जिद केदल में तरावीह मुकम्मल होने के उपलक्ष्य में एक और भव्य इफ्तार पार्टी होने जा रही है। सदर ने पूरे इलाके को बड़े प्यार से न्योता दिया है, जरूर शिरकत करें और खुशियों में शामिल हों।

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