अमेरिकी शुल्क में बदलाव के असर पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी: वित्त मंत्री

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली : केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी शुल्क में किए गए बदलावों के प्रभाव पर बात करना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय इस स्थिति की समीक्षा कर रहा है। नई दिल्ली में प्रेस को संबोधित करते हुए सीतारमण ने अमेरिकी टैरिफ पर कहा कि भारत का व्यापार समझौतों के प्रति स्पष्ट रुख है। वह ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, ओमान, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ समझौते कर चुका है। उन्होंने कहा कि देशों के साथ व्यापार समझौते करने का हमारा प्रयास जारी रहेगा। सीतारमण ने साथ ही कहा कि भारत चाहता है कि उसकी अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर व्यापार करने और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने का लाभ मिले। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोना की कीमत में उछाल के बारे में सवाल पर कहा कि मार्केट से आने वाला सारा सोना आयात किया जाता है। इस देश में कीमती धातुओं पर निर्भरता बहुत ज्यादा बाहर से ही है…हमारे पास सोना खोजने और निकालने का अपना कोई सोर्स नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन हमारी डिमांड पूरी करने के लिए काफी नहीं हैं। हमारे घरेलू खपत के लिए सोने और चांदी की कीमतों में ग्लोबल बढ़ोतरी के कारण असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि आज अधिकांश देश खासकर उनके सेंट्रल बैंक, सोना और चांदी खरीद रहे हैं और उन्हें स्टोर कर रहे हैं, लेकिन अब यह उछाल काफी हद तक सेंट्रल बैंकों के खरीदने और स्टोर करने की वजह से है।

आरबीआई की नजर में है आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में धोखाधड़ी की जांच : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले पर नजर है, लेकिन इसमें कोई प्रणालीगत समस्या नहीं है। नई दिल्ली में सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में संजय मल्होत्रा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पॉलिसी के तौर पर हम किसी एक बैंक या रेगुलेटेड एंटिटी पर टिप्पणी नहीं करते हैं। हम डेवलपमेंट पर नजर रख रहे हैं। इससे पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वी. वैद्यनाथन ने कहा कि बैंक के कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत के जरिये हरियाणा सरकार के खातों से जुड़ी 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। यह मुद्दा एक इकाई और एक ग्राहक समूह तक सीमित था। यह किसी प्रणालीगत ‘रिपोर्टिंग’ त्रुटि का मामला नहीं है। हरियाणा सरकार ने कथित बैंक धोखाधड़ी के आरोपों के मद्देनजर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ-साथ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को भी सरकारी कार्यों के लिए अपनी समिति से बाहर (डी-एम्पैनल्ड) कर दिया है। इसके बाद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने रविवार को खुलासा किया था कि उसके कर्मचारियों और अन्य लोगों ने हरियाणा सरकार के खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है।

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