बैसाखी पर्व आस्था, उत्साह और समृद्धि का प्रतीक : संजय सर्राफ

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news by sunil verma

रांची । हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि बैसाखी भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो हर वर्ष अप्रैल माह में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष बैसाखी का पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह पर्व विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के कई हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि बैसाखी केवल एक धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि किसानों के लिए फसल कटाई का प्रमुख पर्व भी है। यह समय रबी फसलों के पकने और कटाई का होता है, जब किसान अपनी मेहनत का फल प्राप्त करते हैं। खेतों में लहलहाती फसलें किसानों के चेहरे पर खुशी और संतोष लाती हैं। इस खुशी को व्यक्त करने के लिए लोग भांगड़ा और गिद्धा जैसे पारंपरिक नृत्य करते हैं तथा एक-दूसरे को बधाई देते हैं।
संजय सर्राफ ने बताया कि बैसाखी का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सिख धर्म के लिए यह दिन विशेष रूप से पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1699 में आनंदपुर साहिब में दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस ऐतिहासिक घटना ने सिख समुदाय को एक नई पहचान और संगठन प्रदान किया। इसलिए यह दिन सिख समाज के लिए धार्मिक गौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि बैसाखी सामाजिक एकता और भाईचारे का भी संदेश देती है। इस दिन लोग जाति, धर्म और वर्ग के भेदभाव को भुलाकर एक साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं। विभिन्न स्थानों पर मेले, झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जो इस पर्व को और भी आकर्षक बनाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से मेलों का आयोजन होता है, जहां लोग खरीदारी, मनोरंजन और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं।
संजय सर्राफ ने कहा कि बैसाखी का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि जीवन में कृतज्ञता और सकारात्मकता का भाव जगाना भी है। यह पर्व हमें प्रकृति, अन्नदाता किसान और ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। साथ ही यह हमें परिश्रम, एकता और समर्पण के महत्व को समझाता है।
उन्होंने कहा कि आस्था के दृष्टिकोण से बैसाखी आत्मिक शुद्धि और नवजीवन का संदेश देती है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान कर ईश्वर से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह पर्व नई शुरुआत और आशा का प्रतीक है, जो हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
अंततः बैसाखी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि परंपरा और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम है, जो समाज में आनंद, एकता और समृद्धि का संदेश देता है।

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