Eksandeshlive Desk रांची: शिव शिष्यता के जनक और इस कालखण्ड के प्रथम शिव शिष्य साहब हरीन्द्रानन्द की चतुर्थ पुण्य तिथि शुक्रवार को शिव शिष्यों द्वारा पुण्य स्मृति दिवस के रूप में मनाई गयी। शुक्रवार को पुराना विधानसभा हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति का साक्षी बना। अपने जीवन काल में साहब हरीन्द्रानन्द जनमानस को शिव के गुरू स्वरूप से जोड़ने के लिए सन 1975 ई से ही निरंतर प्रयासरत रहे। उन्होंने जनमानस को बताया कि शिव गुरु हैं। इस धरती का एक एक मानव चाहे वह जिस जाती, धर्म, वर्ण संप्रदाय का हो शिव को अपना गुरु बना सकता है। इस धरती का एक एक मानव शिव शिष्य होने की पात्रता धारित करता है। जैसे चंदा मामा सबके मामा हैं वैसे ही शिव घर घर के बाबा हैं। भगवान शिव से हम सभी संतान, पैसा, परिवार, प्रसिद्धि, ऐश्वर्य मांगते हैं, उनसे ज्ञान कोई नहीं मांगता। वह पंचानन, सदाशिव, दक्षिणामूर्ति विश्व गुरु हैं, उन्हें जगत गुरू कहा गया है। हमारे शास्त्र अटे पड़े हैं शिव के गुरू स्वरूप की महिमा से।भारत के विभिन्न राज्यों से आए लोगों ने वरेण्य गुरुभ्राता के चतुर्थ पुण्य स्मृति दिवस में भाग लिया। विभिन्न राज्यों सहित नेपाल, आदि अन्य देशों से कई लोग आए।विदित हो कि हृदय संबंधी रोग की वजह से 4 सितम्बर 2022 को साहब हरीन्द्रानन्द जी शिवलीन हुए।बिहार के सिवान जिले के अमलोरी ग्राम में 31 अक्टूबर सन 1948 को साहब श्री हरीन्द्रानन्द जी का जन्म हुआ था। इनकी कर्मभूमि भी बिहार रही। सरकारी नौकरी से अवकाश ग्रहण के पश्चात वे झारखंड आ गये। वरेण्य गुरुभ्राता हरीन्द्रानन्द जी की व्यापक्ता और प्रसिद्धि वैश्विक स्तर पर रही। देश विदेश सभी जगह के लोग इनके लिए श्रद्धावनत रहते हैं।वरेण्य गुरुभ्राता की चाहत थी कि समस्त चराचर जगत शिव की शिष्यता ग्रहण करे और उनकी दया के आश्रय में चले ताकि शिव के गुरू स्वरूप की जन-जन में स्थिति से विश्व वाटिका में अध्यात्म अवतरित होकर सहृदयता, समानता और शांति के सुमन खिला देगा और प्रेम के पराग से मानवता सुगंधित हो जाएगी। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्वा० 09 बजे से शिव नाम संकीर्तन एवं जागरण भजन से हुआ। तत्पश्चात् वरेण्य गुरुभ्राता साहब हरीन्द्रानन्द की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित किया गया। श्रद्धांजलि सभा में महिलाओं की संख्या अधिक थी।इस अवसर पर मुख्यालाहकार अर्चित आनंद ने बताया कि देश विदेश में शिवशिष्यों ने अपने स्तर पर पुण्यस्मृति दिवस का आयोजन किया, जिसमें वृद्धाश्रम, अनाथालय में सहयोग सहित वृक्षारोपण भी कर रहे हैं। आनंद ने पड़ोसी देश नेपाल में आये भीषण बाढ़ त्रासदी में अपनी जान गंवा चुके लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए साहब हरीन्द्रानंद से दया की याचना की तथा विश्व भर में […]
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