पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता और रश्मि प्रकाश हुए शामिल
अशोक अनन्त
चतरा: झारखंड का महापर्व और प्रकृति की आराधना का उत्सव ‘सरहुल’ आज चतरा जिले में पूरे जोश और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंडों तक, हर तरफ जनजातीय संस्कृति की अनूठी छटा बिखरी हुई है। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद निकली भव्य शोभा यात्रा में हजारों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चों ने शिरकत की, जिससे चतरा की सड़कें जनसैलाब से सराबोर नजर आईं। सरहुल के इस पावन अवसर पर चतरा का उत्साह चरम पर है। पारम्परिक वेशभूषा में सजे जनजातीय समुदाय के लोगों ने यह साबित कर दिया कि वे पर्यावरण संरक्षण को लेकर आज भी उतने ही सजग हैं, जितने उनके पुरखे थे। ढोल, नगाड़ों और मांदर की थाप पर थिरकते लोगों के बीच झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता, राजद नेत्री रश्मि प्रकाश, और चतरा डीडीसी अमरेंद्र कुमार सिन्हा भी मौजूद रहे। जुलूस के दौरान निकाली गई झांकियां आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं। इनमें जनजातीय जीवनशैली और जंगल के साथ उनके गहरे जुड़ाव को खूबसूरती से प्रदर्शित किया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों, जिनमें सदर थाना प्रभारी अवधेश सिंह और सदर बीडीओ शामिल थे, की मौजूदगी में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच यह उत्सव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। इस मौके पर पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता और रश्मि प्रकाश ने ‘जल, जंगल और जमीन’ को बचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारे पुरखों ने प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहने की जो गौरवशाली परंपरा शुरू की थी, उसे हर हाल में बनाए रखना है। शोभा यात्रा में शामिल लोगों ने प्रतीकात्मक वेशभूषा के माध्यम से जंगल बचाने की मार्मिक अपील की, जिसे आम जनता ने खूब सराहा। कुल मिलाकर, चतरा में सरहुल का यह पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पर्यावरण रक्षा का एक महासंकल्प बनकर उभरा है। चतरा की सड़कों पर उमड़ा यह सैलाब प्रकृति और संस्कृति के प्रति जनजातीय समुदाय के अटूट प्रेम की गवाही दे रहा है।
