भारत-श्रीलंका के बीच शैक्षणिक और साहित्यिक सहयोग को मिलेगी नई दिशा
SUNIL VERMA
रांची: श्रीलंका केलानिया विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ ग्रैजुएट स्टडीज ने झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे), रांची के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. उपेन्द्र कुमार सत्यार्थी को शोध सह-निर्देशक नियुक्त किया है। यह नियुक्ति भारत और श्रीलंका के बीच शैक्षणिक, भाषायी और साहित्यिक सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। डॉ. सत्यार्थी केलानिया विश्वविद्यालय के हिंदी अध्ययन विभाग की शोधार्थी आरएम पी.एस. रत्नायक के शोध विषय “प्रेमचंद की कहानी कला और संवेदना” का सह-निर्देशन करेंगे। इस शोध के अंतर्गत प्रेमचंद की कथा-शैली, सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना और उनकी कहानियों में निहित युगबोध का आलोचनात्मक विश्लेषण किया जाएगा।
इस उपलब्धि पर झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास, कुलसचिव के.के. राव, निदेशक आईक्यूएसी प्रो. आर.के. डे, डीन-अकादमिक प्रो. अरुण कुमार पाढ़ी, डीन अनुसंधान एवं विकास प्रो. मनोज कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. बी.बी. मिश्रा सहित विश्वविद्यालय समुदाय ने हर्ष व्यक्त किया। कुलपति प्रो. दास ने कहा कि “डॉ. सत्यार्थी का चयन विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। यह हमारे शिक्षकों की अकादमिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रमाण है, जो भारत-श्रीलंका के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देगा।” हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रत्नेश विश्वकसेन ने कहा कि “डॉ. सत्यार्थी हिंदी और सिंहली साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन के क्षेत्र में वर्षों से सक्रिय हैं। उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव छात्रों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणादायक और लाभकारी होगा।” उल्लेखनीय है कि डॉ. सत्यार्थी हिंदी और सिंहली भाषा के प्रमुख साहित्यकारों के तुलनात्मक अध्ययन में निरंतर कार्यरत हैं और श्रीलंका के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी साहित्य एवं तुलनात्मक अध्ययन पर व्याख्यान दे चुके हैं। उनके प्रयासों से श्रीलंका में हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति रुचि और समझ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल सीयूजे बल्कि भारतीय हिंदी साहित्य के लिए भी गौरव का क्षण है, जो भविष्य में भारत और श्रीलंका के बीच साहित्यिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को और मजबूत करेगी।
