डीआईटी एडमिशन मामले में उच्च न्यायालय ने अगले आदेश तक सीबीआई जांच पर लगायी रोक

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Eksandeshlive Desk

रांची : धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (डीआईटी) में अनुमति से ज्यादा विद्यार्थियों के नामांकन मामले में राज्य सरकार की अपील (एलपीए) पर झारखंड उच्च न्यायालय में गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सीबीआई जांच पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उच्च न्यायालय के आदेश के तहत मामले में पीई दर्ज कर लिया गया है। वहीं महाधिवक्ता राजीव रंजन ने खंडपीठ को बताया कि डीआईटी को 9 सितंबर 2025 को सिर्फ 60 विद्यार्थियों के एडमिशन की अनुमति मिली थी, लेकिन संस्थान ने 138 छात्रों का नामांकन कर लिया।

महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि कॉलेज ने गलती करने के बावजूद उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की, जिसकी सुनवाई 12 और 13 जनवरी को हुई थी। हाई कोर्ट ने 13 जनवरी को मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार और झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ( जेयूटी) ने अपील दायर की है। दरअसल बीते 13 जनवरी को उच्च न्यायालय के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने डीआईटी के इंजीनियरिंग छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोके जाने की सीबीआई जांच करने के आदेश दिए थे। अदालत ने प्रथम दृष्टया इसे छात्रों को फंसाने और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ का मामला बताते हुए सीबीआई को झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलाजी (जेयूटी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटी ) की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने सीबीआई को इस बात की जांच करने को कहा था कि एआईसीटीई और जेयूटी ने छात्रों को किस प्रकार फंसाया है और पूरे मामले में किस अधिकारी या संस्था ने क्या भूमिका निभाई है। इस मामले में डीआईटी ने उच्च न्यायालय की एकल पीठ में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि एआईसीटी ने 30 अप्रैल 2025 को संस्थान को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए विद्यार्थियों के एडमिशन के लिए विधिवत स्वीकृति प्रदान की थी। इसी स्वीकृति के आधार पर संस्थान ने छात्रों का नामांकन किया।

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