डीएसई पहुंचे प्रतापपुर, शिक्षकों में मचा हड़कंप

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अजय राज
प्रतापपुर(चतरा): शनिवार को दोपहर बाद प्रतापपुर प्रखंड अंतर्गत कई विद्यालयों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बिना पूर्व सूचना के जिला शिक्षा अधीक्षक रामजीत कुमार अचानक प्रतापपुर पहुंचे। इस बीच कई वैसे विद्यालयों के शिक्षक जो प्रायः बायोमेट्रिक अटेंडेंस बनाकर स्कूल से अनुपस्थित रहते हैं या किसी अन्य कार्य में लग जाते हैं वे भी आनन फानन में भागते हुए स्कूल पहुंच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के होड़ में लगे दिखे। प्रतापपुर पहुंचने के बाद जिला शिक्षा अधीक्षक सबसे पहले योगीडीह पंचायत स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय महकमपुर पहुंचे तथा शिकायत के आलोक में जांच आदि किया। मालूम हो कि महकमपुर उच्च विद्यालय को लेकर गांव के कुछ लोगों द्वारा उपायुक्त चतरा को लिखित शिकायत की गई थी। जिसे लेकर उपायुक्त के निर्देश पर जिला शिक्षा अधीक्षक रामजीत कुमार जांच हेतु उक्त विद्यालय पहुंचे थे।हालांकि पूरे मामले की जानकारी लेने हेतु कई बार उन्हें फोन किए जाने के बाद भी उन्होंने फोन नहीं उठाया। प्रतापपुर लौटने के दरम्यान जिला शिक्षा अधीक्षक उत्क्रमित मध्य विद्यालय मंगरा पहुंच स्कूल का निरीक्षण आदि किए तथा प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज कुमार को पठन पाठन व एमडीएम आदि को लेकर जरूरी निर्देश दिए। वहीं कन्या मध्य विद्यालय प्रतापपुर पहुंचने पर बच्चों को खेलते देख उन्होंने नाराजगी जताई तथा बच्चों से खुद मुखातिब होते हुए पढ़ाई लिखाई तथा कितनी घंटी पढ़ाई होती है कितने शिक्षक पढ़ाते हैं और उपस्थित रहते हैं आदि की जानकारी ली।।हालांकि इन बातों की पुष्टि हेतु जब प्रभारी प्रधानाध्यापिका पुष्पा कुमारी को फोन किया गया तो उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया। यहां इस बात का जिक्र करना भी जरूरी है कि कन्या मध्य विद्यालय में कहने को तो दर्जन भर शिक्षक नियुक्त हैं परंतु स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों द्वारा बताया जाता है कि उनमें से कई शिक्षक बायोमेट्रिक अटेंडेस बना कर अपने निजी काम में व्यस्त रहते हैं। अगर इस बात में सच्चाई है तो फिर उन बच्ची का क्या होगा जिनका भविष्य संवारने के लिए उनके माता पिता बड़े विश्वास के साथ उन्हें पढ़ने हेतु सरकारी विद्यालय भेजते हैं। तो दूसरी तरफ अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर उच्चाधिकारियों के द्वारा स्कूलों का चुपके से औचक निरीक्षण करना और मीडिया से दूरी बनाए जाने के पीछे क्या राज छुपा है या ऐसी क्या मजबूरी है। ये समझ से परे है जिसका जवाब आम ग्रामीण भी जानना चाहती है।

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