दिल्ली में यमुना खतरे के निशान से दो मीटर से ज्यादा ऊपर, हिमाचल में बारिश का कहर

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली/शिमला : दिल्ली में खतरे के निशान से 2 मीटर से ज्यादा ऊपर बह रही यमुना के जलस्तर में गुरुवार को भी वृद्धि जारी है। यमुना का जलस्तर गुरुवार को सुबह 10 बजे 207.47 दर्ज किया गया। हरियाणा के हथिनीकुंड बांध से गुरुवार को 1,33,995 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। हालांकि दोपहर 12 बजे यमुना का जलस्तर मामूली गिरावट के साथ 207.46 दर्ज किया गया है। इस दौरान हथिनीकुंड़ से 1,35,702 क्यूसेक पानी छोड़ गया है। यमुना से सटे इलाकों में बुधवार से ही पानी भरना शुरू हो गया है। प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगा हुआ है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार को कहा कि हमने सारे इंतजाम कर लिए हैं और यमुना के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। कई वर्षों बाद इतना पानी आया है, लोहे के पुल तक पानी आ गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और बाढ़ नियंत्रण एवं सिंचाई मंत्री प्रवेश साहिब सिंह लगातार इसकी समीक्षा कर रहे हैं। हथिनी कुंड से छोड़े जा रहे पानी को लेकर मुख्यमंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से भी बात की है। हमें उम्मीद है कि अगर बारिश रुक गई, बारिश का पानी जलग्रहण क्षेत्र तक नहीं पहुंचा, तो स्थिति नियंत्रण में है और नियंत्रण में ही रहेगी। वहीं हिमाचल प्रदेश में जारी बारिश और भूस्खलन ने अब तक भारी तबाही मचाई है। राज्य में वर्षाजनित हादसों में अब तक 355 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 49 लोग अभी भी लापता हैं और 416 घायल हुए हैं।

यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन तक जाने वाला संपर्क मार्ग फिलहाल दुर्गम : इस बीच दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने गुरुवार को एक्स पोस्ट में कहा कि यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण, यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन तक जाने वाला संपर्क मार्ग फिलहाल दुर्गम है। कृपया अपनी यात्रा की योजना उसी के अनुसार बनाएं और वैकल्पिक मार्गों पर विचार करें। यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन चालू है और इंटरचेंज सुविधा भी उपलब्ध है। कश्मीरी गेट आईएसबीटी के आसपास बुधवार को पानी भरने और जाम की वजह से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कश्मीरी गेट के आसपास बुधवार देर रात तक काफी भीड़ दिखी और सैकड़ों की संख्या में लोग पैदल ही कश्मीरी गेट से शास्त्री पार्क की ओर जाते दिखाई दिए। ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा चालकों ने सवारियों से दोगुने और चौगुनी पैसे वसूले। गुरुवार को भी कश्मीरी गेट आईएसबीटी के सामने वाली सड़क पर पानी भरा हुआ है, जिससे वाहनों की गति धीमी रही। खजूरी से लेकर शास्त्री पार्क तक दिल्ली देहारदून एक्सप्रेसवे के नीचे यमुना किनारे बसे लोग अपने पशुओं को खुद टेंट बनाकर रख रहे हैं। इन लोगों ने अपने पशुओं को सड़क के दोनों ओर बांधा है, जिसकी वजह से यहां जाम की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन के लोग भी टेंट और राहत सामग्री पहुंचने में जुटे दिखाई दिए।

हिमाचल में 355 मौतें, 49 लापता, 1208 सड़कें ठप, 3787 करोड़ का नुकसान : हिमाचल प्रदेश में जारी बारिश और भूस्खलन ने अब तक भारी तबाही मचाई है। राज्य में वर्षाजनित हादसों में अब तक 355 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 49 लोग अभी भी लापता हैं और 416 घायल हुए हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से जारी जिलावार आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा 58 लोगों की मौत मंडी जिले में हुई है। कांगड़ा में 50, चंबा में 43, शिमला में 38, कुल्लू में 31, किन्नौर में 28, सोलन में 25, उना में 21, बिलासपुर और सिरमौर में 18-18, हमीरपुर में 16 और लाहौल-स्पीति में 9 लोगों की जान गई है। इसके अलावा बरसात के कहर से 3,136 पशु और 25 हजार से ज्यादा पोल्ट्री पक्षियों की मौत हो चुकी है। प्रदेश में हुई लगातार भारी बारिश और भूस्खलनों से हजारों घर जमींदोज हो गए हैं। अब तक 5,194 कच्चे-पक्के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें 1,012 पूरी तरह ढह गए। 447 दुकानें और 4,510 पशुशालाएं भी धराशायी हो गई हैं। राज्य सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का प्रारंभिक आकलन 3787 करोड़ रुपये लगाया है। इसमें अकेले लोक निर्माण विभाग को 2252 करोड़, जलशक्ति विभाग को 1238 करोड़ और ऊर्जा विभाग को 139 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

4 नेशनल हाइवे व 1208 सड़कें ठप : राज्य में सड़कों और यातायात व्यवस्था की हालत बदतर बनी हुई है। गुरुवार शाम तक चार नेशनल हाइवे और 1208 अन्य सड़कें पूरी तरह अवरुद्ध रहीं। बंद पड़े नेशनल हाइवे में किन्नौर का एनएच-05, कुल्लू का एनएच-03 और एनएच-305, लाहौल-स्पीति का एनएच-505 और मंडी का एनएच-03 शामिल हैं। अकेले मंडी जिले में 287 सड़कें बंद हैं, जबकि कुल्लू में 230, शिमला में 211, चंबा में 192 और कांगड़ा में 41 सड़कें यातायात के लिए ठप हैं। बारिश से बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी बड़ा असर पड़ा है। प्रदेश में 1885 ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं। इनमें सबसे अधिक 999 ट्रांसफार्मर कुल्लू में, 259 शिमला में, 307 मंडी में, 130 सिरमौर में और 136 सोलन में बंद पड़े हैं। इसी तरह 824 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिनमें 348 शिमला, 187 चंबा, 93 सिरमौर और 78 मंडी में ठप हैं। मॉनसून सीजन के दौरान प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला भी लगातार जारी रहा है। अब तक प्रदेश में 130 भूस्खलन, 95 फ्लैश फ्लड और 45 बादल फटने की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। लाहौल-स्पीति में सबसे ज्यादा 26 बार भूस्खलन और 56 बार फ्लैश फ्लड की घटनाएं हुई हैं, जबकि मंडी जिला बादल फटने की 19 घटनाओं के साथ सबसे आगे रहा है। मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों के दौरान सोलन जिले के धर्मपुर में सबसे अधिक 74 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। करसोग में 69, कसौली में 67, कंडाघाट में 59, नैनादेवी में 58, भुंतर में 55, बिलासपुर में 50, सराहन और शिमला में 47-47 और काहू में 45 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई। विभाग ने कल के लिए प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने का येलो अलर्ट जारी किया है। हालांकि राहत की खबर यह है कि छह सितंबर से मॉनसून कमजोर पड़ने के आसार हैं और 10 सितंबर तक केवल हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। इस दौरान भारी बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है, जिससे अगले सप्ताह तक बारिश से जूझ रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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