Ashutosh Jha
काठमांडू : ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्री दीपक खड़का ने विश्वास जताया है कि कर्णाली–चिसापानी जलविद्युत परियोजना नेपाल, भारत, चीन सहित पूरे दक्षिण एशिया की एक साझा आदर्श परियोजना बन सकती है। राजधानी काठमांडू में आयोजित रसुवा में पूर्ण साञ्जेनखोला जलविद्युत परियोजना (78 मेगावाट) के उद्घाटन कार्यक्रम में बोलते हुए मंत्री खड़का ने कहा कि कर्णाली–चिसापानी परियोजना की प्रारंभिक क्षमता 10,800 मेगावाट आंकी गई थी, लेकिन तकनीकी परिमार्जन के बाद यह क्षमता करीब 15,000 मेगावाट से अधिक पहुंच सकती है।
मंत्री खड़का ने कहा कि यदि नेपाल, भारत, चीन और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी राष्ट्र मिलकर इस परियोजना को आगे बढ़ाएं, तो यह दक्षिण एशिया में ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला सकती है और इस क्षेत्र की आर्थिक, सामाजिक तथा ऊर्जा सुरक्षा के साथ ही नेपाल की समृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि इस तरह की परियोजनाएं पड़ोसी मित्र राष्ट्रों के साथ आर्थिक एवं जनस्तरीय संबंधों को भी और मजबूत करेंगी। “बांग्लादेश को हमने हाल ही में बिजली निर्यात करना शुरू किया है। यदि ये चारों देश मिलकर इस परियोजना को आगे बढ़ाते हैं, तो यह क्षेत्रीय सहयोग का एक बेहतरीन मॉडल बन सकता है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन में कटौती की दिशा में किए जा रहे अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों में भी कर्णाली–चिसापानी परियोजना एक महत्वपूर्ण योगदान देगी। नेपाल सरकार ने वर्ष 2045 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने का लक्ष्य रखा है और मंत्री खड़का के अनुसार यह परियोजना उस लक्ष्य को हासिल करने में ठोस योगदान दे सकती है।
यह परियोजना समूचे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा रूपांतरण के दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। मंत्री खड़का के अनुसार यह परियोजना दक्षिण एशियाई देशों के बीच के ‘जियोपॉलिटिकल’ मुद्दों को संतुलन में रखने का एक अवसर भी बन सकती है। उन्होंने इसे न केवल नेपाल की, बल्कि पूरे क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा की आधारशिला बताया।
