दक्षिण पूर्व रेलवे ने किया कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार

NATIONAL

Eksandeshlive Desk

कोलकाता : रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए प्रमुख शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार किया जा रहा है ताकि भीड़भाड़ कम हो और यात्री सुविधाओं में सुधार हो। यह पहल रेलवे नेटवर्क को उन्नत करेगी और देशव्यापी संपर्क को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करेगी। यात्रा की मांग में तीव्र और निरंतर वृद्धि को देखते हुए, अगले 5 वर्षों में प्रमुख शहरों की नई ट्रेनों को प्रारंभ करने की क्षमता को वर्तमान स्तर से दोगुना किए जाने की आवश्यकता है। वर्तमान अवसंरचना को आगामी वर्षों की आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है। वर्ष 2030 तक विभिन्न शहरों में ट्रेनों की प्रारंभिक क्षमता को दोगुना करने के लिए विभिन्न कार्य किए जाएंगे।

ये कार्य किए जाएंगे : योजनाओं के अनुसार मौजूदा टर्मिनलों का विस्तार – अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, स्टेबलिंग लाइन, पिट लाइन एवं पर्याप्त शंटिंग सुविधाएं। शहरी क्षेत्र के भीतर एवं आसपास नए टर्मिनलों की पहचान एवं विकास। रखरखाव सुविधाएं, जिनमें मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। विभिन्न स्थानों पर बढ़ती ट्रेनों को संभालने हेतु ट्रैफिक सुविधाओं, सिग्नलिंग उन्नयन एवं मल्टी-ट्रैकिंग के माध्यम से सेक्शन क्षमता में वृद्धि। टर्मिनल क्षमता बढ़ाने की योजना बनाते समय, टर्मिनलों के आसपास के स्टेशनों को भी सम्मिलित किया जाएगा ताकि क्षमता का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जा सके। उदाहरणस्वरूप, पुणे के लिए हडपसर, खड़की एवं आलंदी स्टेशनों को पुणे स्टेशन के साथ-साथ क्षमता वृद्धि हेतु शामिल किया गया है। यह पूरी योजना उपनगरीय तथा गैर-उपनगरीय दोनों प्रकार के यातायात को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाएगी, क्योंकि दोनों की आवश्यकताएँ भिन्न हैं। 48 प्रमुख शहरों के लिए एक व्यापक योजना विचाराधीन है। इस योजना में लक्ष्य को समयबद्ध ढंग से प्राप्त करने हेतु नियोजित, प्रस्तावित या स्वीकृत कार्य सम्मिलित होंगे। वर्ष 2030 तक क्षमता दोगुनी करने की योजना के अंतर्गत, अगले पाँच वर्षों में चरणबद्ध रूप से क्षमता बढ़ाई जाएगी ताकि इसके लाभ तत्काल यात्रियों को मिल सकें। इससे आगामी वर्षों में यातायात की आवश्यकताओं को क्रमिक रूप से पूरा करने में सहायता मिलेगी। योजना के अंतर्गत कार्यों को तीन श्रेणियों—तत्काल, अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक—में वर्गीकृत किया जाएगा। प्रस्तावित योजनाएं स्पष्ट समय-सीमा एवं परिभाषित परिणामों के साथ विशिष्ट होंगी। यद्यपि यह पहल कुछ चयनित स्टेशनों पर केंद्रित है, फिर भी प्रत्येक जोनल रेलवे को अपने मंडलों में ट्रेन हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने की योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि टर्मिनल क्षमता के साथ-साथ सेक्शन क्षमता एवं परिचालन बाधाओं का भी समाधान किया जा सके। दक्षिण पूर्व रेलवे में जिन शहरों की पहचान की गई है उनमें कोलकाता, टाटानगर, रांची शामिल हैं।

रांची मंडल में बालसिरिंग : हटिया कोचिंग यार्ड में परिचालन संबंधी सीमाएं तथा स्थान की कमी है, जिसके कारण भविष्य की ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रखरखाव आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन है। इसकी भौगोलिक संरचना तथा घंटी-आकार (Bell Curve) का यार्ड लेआउट भविष्य के विस्तार हेतु अनुपयुक्त है। वर्तमान में उपलब्ध आठ वॉशिंग पिट केवल हटिया आधारित मौजूदा ट्रेनों के रखरखाव की आवश्यकताओं को ही किसी तरह पूरा कर पा रहे हैं। हटिया कोचिंग डिपो पर भार कम करने एवं भविष्य की ट्रेनों के लिए एक अत्याधुनिक आधुनिक कोचिंग डिपो विकसित करने के उद्देश्य से एक वैकल्पिक टर्मिनल विकसित किए जाने की आवश्यकता है। हटिया से 6 किलोमीटर दूर स्थित समीपवर्ती स्टेशन बालसिरिंग इस भूमिका के लिए उपयुक्त है। इस स्टेशन की सड़क संपर्क व्यवस्था अत्यंत उत्कृष्ट है। रांची रिंग रोड स्टेशन से मात्र 500 मीटर की दूरी पर है। बलसिरिंग, हटिया से लगभग 6 किमी, रांची एयरपोर्ट से 8 किमी तथा रांची शहर केंद्र से लगभग 13 किमी दूर स्थित है। सभी दक्षिण एवं पश्चिम दिशा की ट्रेनें हटिया या रांची के स्थान पर बलसिरिंग से प्रारंभ की जा सकती हैं। उत्तर दिशा की ट्रेनें बलसिरिंग से प्रारंभ होकर लोढ़मा–पिस्का बाईपास के वाई-कनेक्शन से होते हुए टोरी के माध्यम से उत्तर भारत की ओर जा सकती हैं।वैकल्पिक रूप से, उत्तर एवं पूर्व दिशा की ट्रेनें बलसिरिंग से प्रारंभ होकर हटिया एवं रांची में यात्रियों के चढ़ने-उतरने हेतु लगभग 10-10 मिनट का ठहराव कर सकती हैं और तत्पश्चात अपनी आगे की यात्रा टाटीसिलवे–बरकाकाना, मूरी–बरकाकाना, मूरी–बोकारो अथवा मूरी–चांडिल मार्गों से विभिन्न रूट, दिशाओं, भौगोलिक क्षेत्रों एवं यात्री वर्गों की आवश्यकताओं के अनुरूप जारी रख सकती हैं।

Spread the love