Eksandeshlive Desk
रांची : हटिया कामगार यूनियन (एटक) के उपाध्यक्ष लालदेव सिंह ने एचईसी (हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) को लेकर केंद्र सरकार और एचईसी में कार्यरत भेल प्रबंधन की नीतियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूरों को बकाया वेतन और नियमित भुगतान का भरोसा देकर काम पर बुलाया गया, लेकिन लगातार तीन माह काम कराने के बाद केवल 15 दिनों का वेतन दिया गया। लालदेव सिंह ने सवाल उठाया कि यह कैसा न्याय है, जब एचईसी के मजदूर और कर्मचारी लगभग 35 माह (करीब तीन वर्ष) से वेतन के बिना जीवन यापन करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारी गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। वेतन भुगतान की मांग को लेकर संघर्ष के दौरान कई कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, जबकि अनेक कर्मचारी ठेला-खोमचा लगाने या रोजी-रोटी की तलाश में पलायन करने को विवश हुए हैं।
लालदेव सिंह ने कहा कि मजदूरों को झांसा देकर तीन महीने काम कराना और बदले में सिर्फ 15 दिन का वेतन देना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि इससे न तो मजदूरों का गुजारा संभव है और न ही संस्थान का नियमित संचालन हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एचईसी प्रबंधन इस तरह के फैसलों से क्या साबित करना चाहता है। एटक उपाध्यक्ष ने यह भी बताया कि पिछले पांच वर्षों से केंद्र सरकार ने एचईसी के पुनरुद्धार की जिम्मेदारी भेल प्रबंधन को सौंपी थी। उस समय कर्मचारियों को उम्मीद थी कि भेल के आने से एचईसी की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, लेकिन इसके उलट हालात और खराब होते चले गए। भेल के कार्यभार संभालने के बाद एचईसी का आर्थिक संकट गहराया और कर्मचारियों का वेतन बकाया बढ़कर लगभग तीन साल तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के सामने आज भुखमरी, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई बाधित होने और रोजी-रोटी पर संकट जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार और प्रबंधन कर्मचारियों की पीड़ा के प्रति संवेदनशील नजर नहीं आ रहे हैं। लालदेव सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह एचईसी के मजदूरों और कर्मचारियों के साथ न्याय करे, बकाया वेतन भुगतान के लिए एचईसी को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए और संस्थान को बचाने के साथ-साथ कामगारों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए ठोस व प्रभावी कदम उठाए।
