ईरान और अमेरिका ने परमाणु समझौते के लिए रूपरेखा तैयार करने का काम विशेषज्ञों को सौंपा

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Eksandeshlive Desk

दुबई : ईरान और अमेरिका ने शनिवार को एक संभावित परमाणु समझौते की रूपरेखा तैयार करने के लिए बातचीत की अगली जिम्मेदारी विशेषज्ञों को सौंपने पर सहमति जताई है। यह जानकारी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने राज्य टीवी को दी। यह बैठक रोम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्य पूर्व मामलों के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ ओमानी मध्यस्थ के माध्यम से हुई। यह दोनों पक्षों के बीच एक हफ्ते में दूसरी अप्रत्यक्ष वार्ता थी, जिसमें चार घंटे तक बातचीत चली।

अराकची ने कहा कि बातचीत “उपयोगी और रचनात्मक माहौल में” हुई। उन्होंने बताया, “हम कुछ बुनियादी सिद्धांतों और लक्ष्यों पर प्रगति कर पाए हैं और बेहतर समझ पर पहुंचे हैं। अब तय किया गया है कि बुधवार को ओमान में विशेषज्ञ-स्तरीय बैठकें शुरू होंगी, जहां संभावित समझौते की रूपरेखा तैयार करने का कार्य आरंभ होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि अगले शनिवार को मुख्य वार्ताकार पुनः ओमान में मिलेंगे, ताकि विशेषज्ञों के काम की समीक्षा की जा सके और यह परखा जा सके कि वह संभावित समझौते के सिद्धांतों से कितना मेल खाता है। इस दौरान, अराकची ने ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हालिया टिप्पणी को दोहराते हुए कहा, “हम अत्यधिक आशावादी नहीं हैं, न ही अत्यधिक निराशावादी। हम बहुत सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था और अब उन्होंने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि नया समझौता शीघ्र न हुआ तो सैन्य कार्रवाई हो सकती है। ट्रंप ने हाल ही में कहा, “मैं बस इतना चाहता हूं कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए। वे महान और समृद्ध हो सकते हैं, लेकिन हथियार नहीं होने चाहिए।” वहीं, ईरान पहले से कहता आ रहा है कि वो अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने, अपने सेंटरफ्यूज को हटाने या संवर्धित यूरेनियम के भंडार को 2015 की सीमा से कम करने के लिए तैयार नहीं है। हालांकि ईरान ने यह जरूर साफ किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वो कुछ सीमित प्रतिबंधों के बदले अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से राहत चाहता है।

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