ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ तो तेल और गैस में लगा दी जाएगी आग, आईआरजीसी की दुनिया को चेतावनी

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Eksandeshlive Desk

तेहरान/वाशिंगटन/बेरूत : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का आज शुक्रवार को 14वां दिन है। इस युद्ध की लपटों से क्षेत्र में मौजूद ‘तेल और गैस’ के भंडार पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान के सबसे ताकतवर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि यदि देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और बंदरगाहों पर हमला किया जाता है तो वह इस क्षेत्र के तेल और गैस को आग के हवाले कर देगा। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, आईआरजीसी ने दो-टूक कहा कि यदि ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और बंदरगाहों पर हमला किया गया तो वह इस क्षेत्र के सभी तेल और गैस भंडार में आग लगा देगा। आईआरजीसी की इस चेतावनी से पहले गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा था कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य ( होर्मुज स्ट्रेट) को बंद नहीं करेगा। इससे पहले हाल ही में ईरान के सर्वोच्च नेता चुने गए मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक बयान में कहा कि यह जलमार्ग “दबाव के एक हथियार” के रूप में बंद रहेगा।

आईआरजीसी की अहमियत की वजह : मोजतबा का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को कहा कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से अपना चेहरा नहीं दिखा सकते। वह 28 फरवरी के हमले में बुरी तरह घायल हो चुके हैं। खास बात यह है कि मोजतबा खामेनेई के बयान को सरकारी टीवी में किसी और से पढ़वाया गया। सर्वोच्च नेता का चेहरा नहीं दिखाया गया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को ईरान की सेना की सबसे ताकतवर और विशिष्ट शाखा माना जाता है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद देश के इस्लामी शासन की सुरक्षा के लिए इसका गठन किया गया था। यह संगठन केवल एक सैन्य बल नहीं है, बल्कि ईरान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति में भी गहरा प्रभाव रखता है। ईरान में दो तरह की सेना है। पहली नियमित सेना है। इसे आर्टेश कहा जाता है। यह आमतौर पर सीमाओं की सुरक्षा करती है। दूसरी आईआरजीसी है। यह मुख्य रूप से सत्ता और क्रांति की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। यह संगठन सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर (सर्वोच्च नेता) के प्रति जवाबदेह है, न कि निर्वाचित सरकार के प्रति। आईआरजीसी के पास अपनी स्वयं की थल सेना, नौसेना और वायु सेना है। इसकी दो प्रमुख विशेष शाखा हैं। पहली कुद्स फोर्स और दूसरी बासिज। कुद्स फोर्स विदेशों में ईरान के अभियानों और मिलिशिया समूहों (जैसे हिजबुल्लाह और हमास) का समर्थन करती है। बासिज अर्धसैनिक स्वयंसेवी बल है। इसका उपयोग देश के भीतर विरोध प्रदर्शनों को दबाने और सुरक्षा बनाए रखने के लिए किया जाता है। 29 जनवरी 2026 को यूरोपीय संघ इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है। इससे पहले अमेरिका भी इसे आतंकी समूह घोषित किया था।

ट्रंप ने कहा-आज देखिए क्या होता है ईरान का हश्र : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 28 फरवरी से छिड़े युद्ध के बीच आज अपने सोशल ट्रुथ में काफी तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को ईरान सरकार का क्या हश्र क्या होता है देखिए। ट्रंप ने शुक्रवार सुबह ईरान के नेताओं के लिए और भी कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ पर भी निशाना साधा। ट्रंप ने अपने सोशल ट्रुथ पर ‘जो भी जैसा लिखा’, उसका लगभग भावानुवाद इस प्रकार है, ”हम ईरान के आतंकवादी शासन को पूरी तरह से तबाह कर रहे हैं—सैन्य, आर्थिक और अन्य सभी तरीकों से। फिर भी, अगर आप ‘फेलिंग न्यूयॉर्क टाइम्स’ पढ़ते हैं, तो आपको गलतफहमी होगी कि हम जीत नहीं रहे हैं। ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है। उनकी वायुसेना का अब कोई अस्तित्व नहीं है। मिसाइलें, ड्रोन और बाकी सब कुछ तबाह किया जा रहा है। और उनके नेताओं को धरती के नक्शे से मिटा दिया गया है।” उन्होंने लिखा, ”हमारे पास बेजोड़ मारक क्षमता है। असीमित गोला-बारूद है। और हमारे पास काफी समय भी है। देखते जाइए कि आज इन पागल और नीच लोगों का क्या हश्र होता है। ये लोग पिछले 47 वर्ष से पूरी दुनिया में बेगुनाह लोगों की जान ले रहे हैं। और अब मैं (संयुक्त राज्य अमेरिका का 47वां राष्ट्रपति) इन्हें खत्म कर रहा हूं। ऐसा करना मेरे लिए कितने बड़े सम्मान की बात है! इस मामले पर ध्यान देने के लिए आप सभी का धन्यवाद।- राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रम्प।”

अमेरिकी वायुसेना का रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट पश्चिमी इराक में लापता : अमेरिकी वायुसेना का रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट (यूएस केसी -135) पश्चिमी इराक में लापता हो गया है। इसकी पुष्टि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने की है। इस एयरक्राफ्ट के क्रू में पांच सदस्य हैं। अभी तक किसी भी सदस्य की कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। हालांकि दूसरे रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट की सुरक्षित लैंडिंग करा ली गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एक्स हैंडल पर यह जानकारी साझा की गई है। इसमें कहा गया, ” यूएस सेंट्रल कमांड को यूएस केसी -135 रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट के नुकसान की जानकारी है। यह घटना ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान फ्रेंडली एयरस्पेस में हुई और बचाव का काम जारी है। इस घटना में दो एयरक्राफ्ट शामिल थे। एक एयरक्राफ्ट पश्चिमी इराक में गिर गया, और दूसरा सुरक्षित रूप से लैंड हो गया। यह दुश्मन की फायरिंग या फ्रेंडली फायरिंग की वजह से नहीं हुआ” सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, यूएस सेंट्रल कमांड के बयान में यह नहीं बताया गया कि कोई यूएस कर्मचारी घायल हुआ या मारा गया। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि दूसरे एयरक्राफ्ट केसी -135 को सुरक्षित लैंडिंग करा ली गई है। वायुसेना के अनुसार, केसी-135 फ्लाइट क्रू में आमतौर पर तीन से चार सदस्य होते हैं। इसमें पायलट, को-पायलट और बूम ऑपरेटर होते हैं। ब्रूम ऑपरेटर केसी-135 से हवा में दूसरे एयरक्राफ्ट में ईंधन भरता है। वायुसेना के आधिकारिक दस्तावेज में कहा गया है कि महत्वपूर्ण अभियान में क्रू में नेविगेटर (दिशा की स्थिति का निर्धारण करने वाला) की भी जरूरत होती है। उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते कुवैत में तीन एफ-15ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट गोलीबारी के दौरान गिराए जा चुके हैं। हालांकि सभी छह क्रू मेंबर बाहर सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे।

इजराइल ने लेबनान पर दागे रॉकेट, मिसाइल, बेरूत में कई स्थानों पर लगी आग : अमेरिका-इजराइल के ईरान के खिलाफ 28 फरवरी से शुरू सैन्य अभियान के बाद मध्य पूर्व में युद्ध के बादल छंटते नहीं दिख रहे है। इस युद्ध में ईरान समर्थित लेबनान का आतंकी समूह हिजबुल्लाह भी कूद पड़ा है। इस वजह से इजराइल को लगातार दो मोर्चों ईरान और हिजबुल्लाह से सीधा सामना करना पड़ रहा है। इजराइल ने बेरूद के दक्षिण उपनगरों में ताजा हमले कर हिजबुल्ला के कई ठिकानों को निशाना बनाया है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच तनातनी बरकरार है। इजराइल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में आज तड़के रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। इजराइल ने कहा है कि वह लेबनान से हिजबुल्लाह को खत्म करने के लिए पूरी ताकत झोंक देगा। इसलिए अब बेरूत के बाहरी इलाकों में नए हमले किए गए हैं। इसके जवाब में हिजबुल्लाह ने भी रॉकेट दागे हैं। लेबनान के अधिकारियों के अनुसार, राजधानी बेरूत के दक्षिण में स्थित एक विश्वविद्यालय पर इजरायली हवाई में दो शिक्षाविदों की मौत हो गई।

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