ईरान ने ट्रंप की चुनौती स्वीकार की, कहा-अमेरिका से युद्ध के लिए तैयार

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Eksandeshlive Desk

तेहरान/वाशिंगटन : इस्लामिक गणराज्य ईरान में 28 दिसंबर को महंगाई के खिलाफ शुरू प्रदर्शन देश के सर्वोच्च शासक अली खामेनेई को हटाने के आंदोलन के रूप में बदल गया है। समूचे ईरान में लोग सड़कों पर हैं। इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। सुरक्षा बलों की गोलियों से अब तक कम से कम 2000 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की खबरें हैं। लोग लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। खामेनेई का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को अमेरिका भड़का रहा है। उधर, अमेरिकी ने कई बार चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर दमन जारी रहा तो मजबूत सैन्य हमले के लिए ईरान तैयार रहे। ईरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि वह हर तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं।

ईरान ने कई देशों के राजदूतों को तलब किया : ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर बहुत मजबूत सैन्य हमले पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि तेहरान को प्रदर्शनकारियों पर दमन न करने की चेतावनी की अनदेखी करना बहुत महंगा पड़ेगा। इस पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान निष्पक्ष बातचीत के लिए भी तैयार है, लेकिन वह युद्ध के लिए भी हर तरह से तैयार है। ईरान के स्वास्थ्य अधिकारियों ने दावा किया है कि दो हफ्ते से ज्यादा समय से जारी अशांति में मरने वालों की शुरुआती संख्या हाल के दिनों में बढ़कर कम से कम 2,000 पहुंच गई है। ईरान ने ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और इटली के राजदूतों को तलब किया है। ईरान ने उनकी सरकारों पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने और उसके आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया।

ट्रंप को तीन विकल्पों की जानकारी दी गई : सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप को सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों से ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए तीन विकल्पों की जानकारी दी है। पहला- सैन्य हमला। दूसरा- साइबर ऑपरेशन। तीसरा- प्रदर्शनकारियों का सहयोग करने के लिए मनोवैज्ञानिक रणनीति। अधिकारियों ने कहा कि यह तीनों एक साथ भी हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, “दो अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और कूटनीतिक दरवाजे खुले हुए हैं।” इस बीच, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की निंदा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान के लोग मौजूदा सरकार को हटाकर एक लोकतांत्रिक ईरान स्थापित करेंगे, जहां मानवाधिकारों का सम्मान किया जाएगा। मंगलवार को कैनबरा में अल्बानीज ने कहा, “हम ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं जो एक दमनकारी शासन के खिलाफ लड़ रहे हैं। मुझे उम्मीद है, लोग खामेनेई को हटा देंगे।” विदेशमंत्री पेनी वोंग ने कहा कि मौजूदा ईरानी सरकार की कोई वैधता नहीं है। वह सत्ता बचाने के लिए अपने ही नागरिकों की हत्या कर रही है।

इजराइल में अमेरिकी राजदूत ने कहा- ट्रंप ईरान में नरसंहार नहीं होने देंगे : इजराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप मूकदर्शक नहीं बने रहेंगे। वह ईरान में प्रदर्शनकारियों का चल रहा नरसंहार जारी नहीं रहने देंगे। माइक हकाबी ने सोमवार को स्काई न्यूज से कहा, “ट्रंप लोगों को मरते हुए नहीं देखेंगे। वह यकीनन दखल देंगे। उन्होंने कहा, “ईरान के लोग खामेनेई का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे अपने परिवारों को खाना नहीं खिला सकते। पानी की कमी है। महंगाई इतनी ज्यादा है कि एक ब्रेड का पैकेट खरीदना मुश्किल है। अमेरिकी दूतावास ईरान ने सोमवार को एक वर्चुअली सुरक्षा परामर्श जारी किया। इसमें अमेरिकी नागरिकों से देश भर में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच तुरंत ईरान छोड़ने की अपील की गई। नागरिकों को सलाह दी गई है कि अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर हुए बिना अपने खुद के इंतजाम से तुरंत ईरान छोड़ दें।

ईरान पुलिस प्रमुख ने ट्रंप को चुनौती दी : ईरान के पुलिस प्रमुख अहमदरेज़ा रादान ने सोमवार को प्रदर्शनकारियों की हत्याओं को लेकर इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप की धमकी का जवाब देते हुए कहा: “उन्होंने एक बार यह गलती की थी और उन्हें जवाब मिल गया था, लेकिन अगर वे फिर से आते हैं, तो हम उनकी सेवा के लिए तैयार हैं।” उन्होंने कहा: “हमारे पिछले हमले के जवाब को पचाने में उन्हें बहुत समय लगेगा।” इस बीच निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी ने सोमवार को सीबीएस न्यूज पर प्रसारित एक इंटरव्यू में कहा कि वह ट्रंप प्रशासन के सीधे संपर्क में हैं। यह वक्त गेम-चेंजर हो सकता है। पहलवी ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के अंत और सोवियत संघ के पतन का उदाहरण देते हुए कहा, “कोई भी मुक्ति अभियान तब सफल हुआ है जब दुनिया ने आखिरकार दमनकारी सरकारों को ललकारा।

खामेनेई ने कहा-अमेरिका की साजिश विफल : अली खामेनेई ने सोमवार को एक संदेश में इस्लामिक शासन खत्म करने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को अमेरिका समर्थित भाड़े के सैनिक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने अमेरिकी साजिश को विफल कर दिया है। संदेश में कहा गया कि ” महान ईरान राष्ट्र ने अपने संकल्प और पहचान के साथ खुद को अपने दुश्मनों के सामने पेश किया। यह अमेरिकी राजनेताओं के लिए एक चेतावनी थी कि वे अपना धोखा बंद करें और धोखेबाज भाड़े के सैनिकों पर भरोसा करना बंद करें।”

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