News by Sunil
रांची: सरला बिरला विश्वविद्यालय के प्रांगण में चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व के समग्र विकास को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला शुभांरभ शुक्रवार को किया गया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ अतुल कोठारी ने ओंकार को एकाग्रता में प्रकाश डालते हुए कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति से व्यक्ति के चारित्रिक मूल्यों पर विस्तार होगा । उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब व्यक्तिगत समस्याओं से लेकर सामाजिक और राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान की दिशा में पूरे मनोयोग से प्रयास करें। कार्यशाला के पहले दिन कुल पांच सत्रों का आयोजन किया गया। इस दौरान अपने संबोधन में विवि के माननीय कुलपति प्रो सी जगनाथन ने व्यक्ति विशेष के आंतरिक परिवर्तन पर जोर दिया। हीरे का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस तरह हीरे को तराशने के बाद ही उसकी गुणवत्ता की परख होती है, उसी तरह से अगर व्यक्ति अपने अंदर मौजूद मूल्यों को तराशे, तो उसकी विश्वसनीयता और चारित्रिक निर्माण सुदृढ़ होता है। विवि के महानिदेशक प्रो गोपाल पाठक ने आदि ग्रंथों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज के इस भौतिकवाद के युग में आध्यात्मिकता से कई बुराइयों से निजात पाना संभव है। उन्होंने शिक्षा की राह में चरित्र निर्माण की आवश्यकता को जरूरी बताया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए डीन डॉ. नीलिमा पाठक ने कर्म और चरित्र के बीच के संबंधों पर रोशनी डाली। उन्होंने नैतिक मूल्यों के विकास से सकारात्मक चरित्र के परिवर्तन पर बात की। इंदौर के एसजीआईएसआईएस मेडिकल कॉलेज के प्राध्यापक प्रो. मनोहर भंडारी ने सत्र के दौरान अपने वक्तव्य में चरित्र को स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य को दीघार्यु का रास्ता करार दिया।
सदाचार, चरित्र और जीवनशैली को स्वास्थ्य का मूल आधार बताते हुए अमेरिका के पेन पॉजिटिव साइकोलॉजी सेंटर के निदेशक मार्टिन सेलिगमैन के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए बताया कि खुशी के तीन स्तंभ— सुखद जीवन, अच्छा जीवन और सार्थक जीवन सीधे तौर पर चरित्र से जुड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चरित्र और स्वास्थ्य के बीच गहरा जैविक और मानसिक संबंध है और जिस समाज में चरित्र कमजोर होता है, वहाँ बीमारियाँ मजबूत हो जाती हैं। इंदौर के माता जीजाबाई गवर्नमेंट पोस्टग्रेजुएट गर्ल्स कॉलेज के प्राध्यापक प्रो. दिनेश दवे ने अपने संबोधन में मनोमाया कोश से हमारे मन के संबंधों के बारे में बताया।
जेपी यूनिवर्सिटी, छपरा के कुलपति प्रो पी. के. वाजपेई ने अपने संबोधन में विज्ञान में कोर्स की महत्ता पर बोलते हुए कहा कि यह हमें बुद्धि और बल प्रदान करता है। इससे विद्यार्थियों के निर्णयात्मक क्षमता के विकास में सहायता मिलती है। आत्म साक्षात्कार के विषय में स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यह तभी संभव है, जब हम सभी कोशों को समग्र तरीके से समझें और इसका अनुपालन करें। सरला बिरला विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति श्री बिजय कुमार दलान और माननीय राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने इस कार्यशाला के आयोजन पर हर्ष व्यक्त करते हुए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की है।
