घासी समाज को एसटी का दर्जा दे सरकार : नायक

SOCIETY

Eksandeshlive Desk

रांची : आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने घासी समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने की मांग की है। उन्होंने इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जनजातीय मंत्री चमरा लिंडा सहित संबंधित अधिकारियों को शनिवार को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि आजाद भारत में घासी समाज के साथ हुआ ऐतिहासिक अन्याय अब खत्म होना चाहिए। समाज को एसटी का दर्जा मिलना चाहिए।

घासी समाज छोटानागपुर पठार का मूल निवासी : नायक ने कहा कि घासी समाज छोटानागपुर पठार का मूल निवासी आदिवासी समुदाय है, जो मुंडारी भाषा बोलता है। यह समाज सरना धर्म और सरहुल-करम जैसे आदिवासी पर्व मनाता है। ब्रिटिश काल के दस्तावेज और जनगणना रिपोर्ट्स इसकी जनजातीय पहचान की पुष्टि करते हैं। ऐसे में उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांग नहीं मानी गई, तो घासी समाज शांतिपूर्ण आंदोलन करेगा। और इसका जिम्मेदारी केंद्र व राज्य सरकारों होगी। उन्होंने ऐतिहासिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि 1891 में एचएच रीस्ले की ट्राइब्स एंड कास्ट्स ऑफ बंगाल में घासी को आदिम जनजाति बताया गया है। 1901 की रांची जनगणना रिपोर्ट में 43 जनजातियों में भी इसका उल्लेख है। 1913 की भारत गजट अधिसूचना में मुंडा-उरांव के साथ सूचीबद्ध किया गया था और 1931, 1941 की जनगणना और 1961 के लैंड एंड पीपुल ऑफ ट्राइबल बिहार में भी घासी समाज की आदिवासी परंपराओं का स्पष्ट उल्लेख है। नायक ने कहा कि 1950 के संविधान आदेश में बिना कारण घासी को एसटी से हटाकर एससी सूची में डाल दिया गया। इससे समुदाय अपने असली अधिकारों से वंचित हो गया।

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