सड़क दुर्घटनाएं अब केवल प्रशासनिक नहीं, सामाजिक चिंता का विषय ,सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी: उपायुक्त
Eksandeshlive Desk
गुमला: उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के सतत प्रयासों और नेतृत्व में जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। कुछ माह पूर्व उपायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित सड़क सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान यह पाया गया था कि जिले में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि हो रही है। इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त द्वारा संबंधित विभागों को तत्काल प्रभाव से विशेष ड्राइव चलाने का निर्देश दिया गया।
उक्त निर्देश के आलोक में जिला परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सघन जांच अभियान और जन-जागरूकता कार्यक्रम युद्धस्तर पर संचालित किए जा रहे हैं। जिससे सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी देखने को मिली है।
सड़क सुरक्षा पर प्रशासन की सख़्ती और निरंतर निगरानी
गुमला जिला प्रशासन ने सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख़्त और निरंतर कदम उठाए हैं। जिला परिवहन पदाधिकारी ज्ञान शंकर जायसवाल के नेतृत्व में जुलाई से सितंबर 2025 तक पूरे जिले में गहन वाहन जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों पर न केवल कार्रवाई की गई, बल्कि उन्हें सड़क सुरक्षा के महत्व पर परामर्श भी दिया गया।
अब तक 1600 से अधिक चालकों की काउंसलिंग की गई है और 600 से अधिक लोगों पर बिना हेलमेट चलाने के लिए चालान जारी किया गया है। इसके साथ ही नशे में वाहन चलाने, ओवरस्पीडिंग तथा मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने जैसे मामलों में भी सख्ती से कार्रवाई की गई है।
दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान
उपायुक्त के निर्देश पर सड़क दुर्घटनाओं के संभावित कारणों को चिन्हित करते हुए जिला परिवहन विभाग द्वारा जिले के ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में विशेष जांच और निगरानी बढ़ाई है। करम डीपा, पालकोट रोड, उर्मी बाईपास, कार्तिक उराँव महाविद्यालय, नगफेनी टोल प्लाजा, भरनो, चंदाली, करौंदी, रामनगर चौक, दुन्दुरिया और बाईपास जैसे क्षेत्रों में लगातार वाहन जांच अभियान चलाए जा रहे हैं।
DTO शज्ञान शंकर जायसवाल ने बताया कि इन क्षेत्रों में आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं होती रहती थीं, लेकिन निरंतर जांच और जन-जागरूकता के चलते अब यहां दुर्घटनाओं में कमी देखने को मिल रही है।
परिवहन विभाग के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच जिले में अलग-अलग महीनों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या इस प्रकार दर्ज की गई- अप्रैल में 30, मई में 27, जून में 24, जुलाई में 18, अगस्त में 19 तथा सितंबर में 17। इसी अवधि में जनवरी से मार्च के बीच जहां 66 लोगों की मौत दर्ज हुई थी, वहीं अप्रैल से जून में 74 और जुलाई से सितंबर में 50 मौतों के मामले दर्ज किए गए।
सामाजिक दृष्टिकोण से सड़क सुरक्षा की आवश्यकता
सड़क दुर्घटनाएं केवल आंकड़े नहीं, बल्कि सामाजिक त्रासदी हैं। एक व्यक्ति की असमय मृत्यु से पूरा परिवार प्रभावित होता है।
उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है, जिसे सभी नागरिकों को मिलकर निभाना चाहिए। उन्होंने कहा “सड़क दुर्घटना से केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक पूरा परिवार प्रभावित होता है। इसलिए नागरिकों से मेरा आग्रह है कि वे स्वयं भी नियमों का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। सड़क सुरक्षा के लिए प्रशासन, पुलिस और नागरिकों की सामूहिक भागीदारी ही स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।”
जन-जागरूकता और सामाजिक भागीदारी पर जोर
प्रशासन के इस अभियान का एक मानवीय पक्ष भी है। बिना हेलमेट चल रहे गरीब व असहाय लोगों को उपायुक्त के मार्गदर्शन में निःशुल्क हेलमेट वितरित किए गए हैं, ताकि वे भी सुरक्षित यात्रा कर सकें। साथ ही, विद्यालयों, कॉलेजों और पंचायत स्तर पर सड़क सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित स्वयं प्रत्येक महीने सड़क सुरक्षा से संबंधित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करती हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देती हैं कि सड़क पर नियम तोड़ने वालों के प्रति “शून्य सहिष्णुता” (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाए।
गुमला प्रशासन की प्रतिबद्धता : सुरक्षित गुमला, सुरक्षित सफर
गुमला जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले की प्रत्येक सड़क दुर्घटना-मुक्त बने। इसके लिए आने वाले दिनों में और भी सघन जांच अभियान, ब्लैक स्पॉट पर सुधार कार्य, और जन-जागरूकता कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखा जाएगा।
सड़क सुरक्षा एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि एक सतत सामूहिक प्रयास है। जिला प्रशासन गुमला नागरिकों से अपील करता है कि वे सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें, हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग करें, नशे में वाहन न चलाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
