Eksandeshlive Desk
रांची : झारखंड उच्च न्यायालय ने रामगढ़, सिमडेगा, बरहेट और मधुपुर थानों में दर्ज मामलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर पूर्व में लगी रोक को हटा दिया है। हालांकि, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से एक सप्ताह का समय मांगे जाने पर अदालत ने उसे स्वीकार कर लिया। यह आदेश झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के खिलाफ कथित बयानबाजी से जुड़े मामलों में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग को लेकर बाबूलाल मरांडी की ओर से दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई के बाद पारित किया।
आरोप है कि झारखंड में एक निजी यूट्यूब चैनल पर बाबूलाल मरांडी का एक साक्षात्कार अपलोड किया गया था, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। इस साक्षात्कार के प्रसारित होने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकर्ताओं ने राज्य के विभिन्न थानों में बाबूलाल मरांडी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उपरोक्त मामले को लेकर 25 अगस्त 2023 को सिमडेगा थाना में कांड संख्या 104/2023 दर्ज की गई थी। वहीं बरहेट थाना में भी कांड संख्या 104/2023 दर्ज है। इसी क्रम में 25 अगस्त 2023 को रामगढ़ थाना में कांड संख्या 196/2023 दर्ज की गई थी। इसके अलावा देवघर जिले के मधुपुर थाना में कांड संख्या 176/2023 दर्ज है। इन सभी मामलों को रद्द करने के लिए बाबूलाल मरांडी ने उच्च न्यायालय का रुख किया है। उच्च न्यायालय द्वारा पीड़क कार्रवाई पर लगी रोक हटाए जाने के बाद अब इन मामलों में जांच सहित अन्य कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ सकती हैं। याचिकाकर्ता को दिए गए एक सप्ताह के समय के बाद मामले की अगली सुनवाई की तिथि निर्धारित की जाएगी।
