झारखंड के सभी जिलों में 17 अप्रैल को बिजली के मुद्दे पर भाजपा करेगी बड़ा प्रदर्शन

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Eksandeshlive Desk

रांची : झारखंड के सभी जिलों में 17 अप्रैल को बिजली के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदर्शन करेगी। यह निर्णय झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की अध्यक्षता में गठित नई टीम के प्रदेश पदाधिकारियों की पहली बैठक में लिया गया। प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह मुख्य रूप से मौजूद थे। बैठक प्रारंभ होने के साथ सबसे पहले सभी नए पदाधिकारियों का प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से अभिनंदन एवं स्वागत किया गया। साथ ही सभी को नए दायित्व की शुभकामनाएं दी गईं। मौके पर आदित्य साहू ने कहा कि यह पद नहीं जिम्मेवारी है। पार्टी की नीतियों कार्यक्रमों को धरातल पर उतारने की बड़ी जिम्मेवारी है। इसे प्रदेश पदाधिकारी एक टीम भावना के साथ पूरा करें। उन्होंने कहा कि एक तरफ देश में पिछले 12 वर्षों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गांव, गरीब, किसान, दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा। देश का स्वाभिमान व सम्मान बढ़ रहा है। वहीं दूसरी ओर आम आदमी झारखंड की वर्तमान सरकार से ऊब चुका है।

2029 में झारखंड में डबल इंजन की सरकार बनाना ही पार्टी का लक्ष्य : आदित्य साहू ने कहा कि भाजपा ने अलग राज्य का गठन कराया है। हम इसे लूटते बर्बाद होते नहीं देख सकते। उन्होंने कहा कि नई जिम्मेवारियों के साथ हम राजनीतिक मैदान में उतरेंगे, तो हमें चैन से नहीं बैठना है और इस अत्याचारी सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प पूरा करना है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 2029 में झारखंड में डबल इंजन की सरकार बनाना ही पार्टी का लक्ष्य है। आत्मनिर्भर भारत का संकल्प तभी पूरा होगा जब झारखंड में डबल इंजन की सरकार बनेगी। राज्य की जनता हमारे साथ है। आप पदाधिकारियों पर बड़ी जिम्मेवारी है। उन्होंने सभी पदाधिकारी से राज्य सरकार के काले कारनामों को अपने अपने स्तर से जनता के समक्ष लाने की बात भी कही। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इस सरकार से जनता त्रस्त हो चुकी है। सरकार लगातार जनविरोधी निर्णय ले रही है। हेमंत सोरेन की सरकार में जनहित का कोई काम नहीं हो रहा है। कह सकते हैं कि हेमंत सरकार देश की सबसे भ्रष्ट सरकार है। भाजपा की नवगठित टीम में ऊर्जावान नेताओं की फौज है। उन्होंने नए पदाधिकारियों से राज्य सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए संकल्पित होने का आह्वान किया। संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने भी पदाधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाने के साथ पदाधिकारियों को लगातार सांगठनिक दौरा करने का भी निर्देश दिया। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाऊरी ने बैठक में लिए गए निर्णयों को विस्तार पूर्वक सामने रखा। अमर बाउरी ने कहा कि प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक के दौरान राजनीतिक हालात और सांगठनिक मुद्दों पर विस्तार पूर्वक चर्चा हुई। कुछ भावी आंदोलन की रूपरेखा बनाई गई है। साथ ही वर्तमान में चल रहे पार्टी के स्थापना दिवस और राज्यव्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलता पूर्वक अमलीजामा पहनाने पर गहन मंथन हुआ। पार्टी के वरीय नेताओं ने इसको लेकर कई निर्देश भी दिया है। 14 अप्रैल को डॉ. भीम राव आंबेडकर की जन्म जयंती को सांगठनिक स्तर पर मनाने के संबंध में भी सभी पदाधिकारी को निर्देशित किया गया। इस दिन सभी जिलों में बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता के कार्यालय के समक्ष बिजली कटौती, बिजली दर में वृद्धि एवं बिजली बिल की विसंगतियों से आम लोगों की हो रही परेशानी के मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया। बिजली के बाद अगला मुद्दा पानी का होगा, जिसपर पार्टी बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में है।

झारखंड में वित्तीय कुप्रबंधन चरम पर, बजट का 15 प्रतिशत खर्च नहीं : वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड की वित्तीय स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य में वित्तीय अव्यवस्था अब चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में शाहदेव ने कहा कि ताज़ा बजट आंकड़े यह दर्शाते हैं कि सरकार एक ओर संसाधनों की कमी की बात करती है, जबकि दूसरी ओर उपलब्ध धन का समुचित उपयोग करने में विफल रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के लगभग 1.45 लाख करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले सरकार केवल 1.23 लाख करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी, जिससे राजकोष पर अनावश्यक दबाव बढ़ा है। शाहदेव के अनुसार, सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि बजट का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा खर्च ही नहीं हो पाया। उन्होंने इसे झारखंड की जनता के साथ “क्रूर मजाक” करार दिया। उनका कहना है कि कई जनकल्याणकारी विभागों-जैसे स्कूली शिक्षा, पंचायती राज, नगर विकास, कृषि और स्वास्थ्य में खर्च 50 से 70 प्रतिशत के बीच ही सीमित रह गया, जो विकास कार्यों में बाधा और आम लोगों के अधिकारों की अनदेखी को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही का खामियाजा आम जनता, कर्मचारी और पेंशनभोगी उठा रहे हैं। पेंशन भुगतान में देरी और कर्मचारियों के वेतन में बाधा को उन्होंने सरकार की गलत प्राथमिकताओं का परिणाम बताया। शाहदेव ने कहा कि सरकार केंद्र से मिलने वाले संसाधनों का सही उपयोग नहीं कर पा रही है और बाद में वित्तीय संकट का हवाला देती है। उन्होंने इसे सरकार का “दोहरा चरित्र” बताते हुए कहा कि यदि योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन होता और बजट का सही उपयोग किया जाता, तो राज्य की आर्थिक स्थिति इतनी खराब नहीं होती। उन्होंने अंत में कहा कि मौजूदा सरकार के पास न स्पष्ट दृष्टि है और न ही प्रभावी कार्य करने की इच्छाशक्ति, जिसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ रहा है।

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